प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे के कायाकल्प के लिए बाहरी निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया था।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु तेजी से इसी राह पर चल पड़े हैं। रेल मंत्री ने रेलवे में देसी और विदेशी निवेश केलिए पूरी तरह से कमर कस ली है। यह पहली बार होगा जब रेलवे अपने स्तर पर नहीं बल्कि देसी और विदेशी कंपनियों से अपनी परियोजनाओं को परवान चढ़ाएगा।
यह निवेश भी सौ प्रतिशत होगा, लेकिन इसका खाका क्या होगा? रेल मंत्रालय ने इसकी भी तैयारी कर ली है। शुक्रवार को रेल मंत्रालय के अधिकारी निवेशकों के साथ मिलकर इस निवेश का खाका तैयार करेंगे।
निवेशकों के साथ तैयार होगी रूपरेखा
अब तक रेलवे में जो भी परियोजना सिरे चढ़ती थी वह खुद उसके अधिकारी और कर्मचारी परवान चढ़ाते थे, लेकिन आगे से अब ऐसा नहीं होगा। इसको लेकर रेलवे यूनियनों में भी असंतोष है, लेकिन रेल मंत्रालय यह पहले ही साफ कर चुका है कि उसके पास लंबित पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा नहीं है।
यही कारण है कि रेलवे की सेहत सुधारने के लिए तेजी से निवेश का एक तंत्र तैयार करने की शुरूआत की जा रही है। अब तक रेलवे के पास इस तरह का कोई भी मॉडल नहीं है। निवेशकों को यह समझाया जाएगा कि उनका निवेश दोनों के लिए फायदा का सौदा साबित होगा।
पीपीपी, एफडीआई, बीओटी पर फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। निवेशकों से खास तौर पर रेलवे कोच, इंजनों के निर्माण, नई लाइनों के निर्माण, लाइनों का दोहरीकरण, रेलवे स्टेशनों के रखरखाव और साफ सफाई, छोटी लाइनों को बड़ी लाइनों में परिवर्तित करने पर बात की जाएगी।