फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला जज यौन उत्पीड़न मामले में नहीं होगी जल्द सुनवाई

विज्ञापन
विज्ञापन
जनहित याचिका में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला जज की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और इसकी न्यायिक जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
विज्ञापन


जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुए अधिवक्ता एमएल शर्मा ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर पीठ ने कहा कि चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ही इस मामले को सूचीबद्ध करेगी।

यदि वह याचिका पर जल्द सुनवाई चाहते हैं तो चीफ जस्टिस की पीठ के समक्ष गुजारिश करें। यह पीठ इस याचिका के सूचीबद्ध होने की स्थिति में ही सुनवाई कर सकती है।
विज्ञापन

मनोहर लाल शर्मा ने दायर की थी याच‌िका

मालूम हो कि इस महिला जज ने अपनी शिकायत में कहा है कि यौन उत्पीड़न के कारण ही उसे न्यायिक सेवा से इस्तीफा देना पड़ा। याचिका अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने दायर की है।

याचिका में इस मामले की जांच के दौरान हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस न्यायाधीश के निलंबन का भी अनुरोध किया गया है जिसने कथित रूप से महिला जज का यौन उत्पीड़न किया।

याचिका में इन आरोपों की जांच के लिए शीर्ष अदालत से अपने ही न्यायाधीशों की सदस्यता वाला जांच आयोग गठित करने और विशाखा प्रकरण में दिए गए निर्देशों के दायरे में कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आगे की कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है।
विज्ञापन

'जज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी'

याचिका में इन आरोपों की जांच के लिए शीर्ष अदालत से अपने ही न्यायाधीशों की सदस्यता वाला जांच आयोग गठित करने और विशाखा प्रकरण में दिए गए निर्देशों के दायरे में कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आगे की कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है।

गौरतलब है कि यौन उत्पीड़न के आरोपों का हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने खंडन करते हुए कहा है कि अगर आरोप सही हों तो उन्हें मौत की सजा दी जाए। यह मामला मंगलवार को लोकसभा में उठाया गया और इसकी कड़ी निंदा की गई।

भाजपा की मीक्षाक्षी लेखी ने सदन में यह मामला उठाते हुए कहा कि इस शर्मनाक कृत्य की सभी को निंदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालतों और कचहरियों का लाभ लोगों को कैसे मिल पाएगा जब वहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा महिला जज की शिकायत की निष्पक्षता से जांच की जानी चाहिए और यदि आरोप सिद्ध होता है तो संबंधित जज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

यदि इस घटना में कुछ भी सच्चाई है तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और दु:खद है। मुझे उम्मीद है कि आरोपों में सच्चाई होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें