सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें चीनी मिलों को 31 अक्तूबर तक ब्याज सहित किसानों को बकाया भुगतान करने को कहा गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दो बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसानों को बकाया भुगतान नहीं किया गया तो वे आत्महत्या कर सकते हैं।
सर्वोच्च अदालत ने एसबीआई और पीएनबी की ओर से पेश अटार्नी जनरल मुकुल रोहतकी के उस दलील को अस्वीकार कर दिया कि चीनी मिलों पर बैंकों का 8000 करोड़ रुपये का बकाया है और दोनों बैंकों के पास मिलों की चीनी के अलावा कोई सिक्योरिटी नहीं है। साथ ही मिलों को किसानों के करीब 5500 करोड़ रुपये के बकाए का भुगतान करना है।
बैंकों की याचिका हुई खारिज
साथ ही चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए बैंकों की याचिकाएं खारिज कर दी।
गौरतलब है कि पांच सितंबर को हाईकोर्ट ने चीनी मिलों को 31 अक्तूबर तक 1,10,000 टन स्टाक बेचकर ब्याज सहित किसानों के बकाए का भुगतान करने का आदेश दिया था।
साथ ही कहा था कि भुगतान पाने का पहला अधिकार किसानों का है, जबकि बैंक ऋण की वसूली के लिए चीनी पर हक चाहते थे। इसी के चलते उनकी ओर से हाईकोर्ट के आदेश को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी गई है।
पीठ के समक्ष बैंकों की ओर से पेश रोहतगी ने कहा कि चीनी मिलों पर बैंकों का 8000 करोड़ बकाया है और उनके पास सिक्योरिटी के तौर पर चीनी के सिवा कुछ नहीं है।
60 एफआईआर दर्ज की गई थीं
इस पर पीठ ने कहा कि मिल मालिकों से बकाया चल और अचल संपत्ति के जरिए भी वसूला जा सकता है। याद रहे कि हाईकोर्ट ने बैंक से ली गई रकम का अन्यत्र उपयोग करने को गन्ना भुगतान के कानूनी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए कहा था कि मिलों ने एक ही स्टाक को बार-बार रखकर फर्जीवाड़ा किया है।
इससे पहले राज्य सरकार ने मिलों को जुलाई के अंत तक बकाया भुगतान करने को कहा था। इसके लिए 52 चीनी मिलों को नोटिस जारी किया गया था और 43 मिलों के खिलाफ मौजूदा सीजन में भुगतान नहीं करने के मामले में 60 एफआईआर दर्ज की गई थीं।