फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी एनकाउंटर के बूते पाया राष्ट्रपति पदक

Mon, 01 Dec 2014 11:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पुवायां (शाहजहांपुर)
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 1993 में 12 अक्तूबर की रात पंजाब निवासी जिस हरजीत सिंह को पुवायां पुलिस ने गांव बिलसड़ी बुजुर्ग के पास एनकाउंटर में मारा जाना बताया था, वह मुठभेड़ फर्जी साबित हो गई है। पटियाला (पंजाब) की सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जस्टिस कंवलजीत सिंह बाजवा ने पटियाला पुलिस के तत्कालीन डीएसपी हरिंदर सिंह, पुवायां के तत्कालीन इंस्पेक्टर आरके सिंह समेत चार अन्य पुलिस कर्मियों को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छुपाने का दोषी ठहराया है। सजा का ऐलान सोमवार को किया जाएगा। आरके सिंह को पंजाब पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। वह इस वक्त सीतापुर जिले में सीओ सिटी के रूप में तैनात थे।
विज्ञापन


मामले में पुवायां पुलिस ने गांव बिलसड़ी बुजुर्ग के पास पंजाब के लुधियाना जिले के थाना पापल के गांव सहास मदारा के हरजीत सिंह को एक लाख का इनामी आतंकी बताते हुए मार गिराया था। एनकाउंटर के बाद उसके शव के पास से 38 बोर का विदेशी रिवाल्वर, 39 कारतूस और 11 खोखों की बरामदगी भी दर्शाई थी।

सीबीआई ने 1998 में शुरू की थी जांच
पुवायां के वकील विजय वर्मा ने हरजीत की हत्या किए जाने का तर्क देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से मामले की जांच कराए जाने और आरके सिंह सहित हरजीत की हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। वर्ष 1996 में वर्मा की ओर से पुवायां थाने में मुकदमा संख्या 275 पर आरके सिंह के खिलाफ धारा 302, 342, 218, 201 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
विज्ञापन


हरजीत सिंह के परिवार के लोगों ने उसकी हत्या किए जाने की बात कहते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर वर्ष 1998 में सीबीआई ने अपहरण, हत्या, शव को खुर्द बुर्द करने का केस दर्ज किया था। बाद में सीबीआई ने हरिंदर सिंह, आरके सिंह, पुवायां के तत्कालीन एसएसआई ब्रजलाल और सिपाही ओंकार सिंह को अभियुक्त बनाया था। पटियाला की सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को जब दोष तय किया तो आरके सिंह वहीं मौजूद थे।
विज्ञापन

मुठभेड़ के बूते पाया दो बार प्रमोशन

बताते हैं कि दो लोगों के एनकाउंटर के एक मामले में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर आरके सिंह को इंस्पेक्टर बनाया गया था। बाद में हरजीत सिंह के एनकाउंटर के बूते उन्हें सीओ के रूप में प्रमोशन मिला था। साथ ही राष्ट्रपति पदक भी मिला था। तत्कालीन एसएसआई ब्रजलाल वर्मा इंस्पेक्टर के रूप में प्रमोशन पा गए थे। सिपाही ओंकार सिंह का भी प्रमोशन हुआ था।

वकील विजय वर्मा ने लिखाई थी हरजीत की हत्या की रिपोर्ट
हरजीत सिंह की हत्या के बाद थाने के पास जीडी के फटे पन्ने पड़े देख पुवायां के कसबरा तकिया मोहल्ले के रहने वाले वकील विजय वर्मा (भूमि विकास बैंक की पुवायां शाखा के अध्यक्ष) को मामले में गड़बड़ी का अंदेशा हुआ था। जीडी के उस फटे मिले पन्ने में दरअसल हरजीत सिंह को पहले थाने लाया जाना दिखाया गया था। बाद में जब एनकाउंटर दिखाया तो उस कागज को गायब करना षडयंत्रकारी पुलिस कर्मियों के लिए जरूरी हो गया था।

उसी पन्ने के आधार पर विजय वर्मा ने हरजीत सिंह के परिवार को न्याय दिलाने की ठान ली और तमाम अधिकारियों से मामले की शिकायत कर हरजीत सिंह की हत्या किए जाने और उसे आतंकी बताकर मारने का श्रेय लिए जाने की शिकायत की थी। उन्होंने पुलिसकर्मियों को प्रमोशन देने का भी विरोध किया था। आखिरकार पुलिस को उनकी ओर से हरजीत सिंह का अपहरण कर हत्या, सबूत मिटाने सहित तमाम धाराओं में रिपोर्ट लिखनी पड़ी थी। उन्होंने क्षेत्र के कई लोगों के साथ डेढ़ वर्ष पूर्व सीबीआई कोर्ट में जाकर गवाही भी दी थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें