55 साल के हुए शिक्षक भगीरथ सिंह महीचा के लिए शिक्षक दिवस भले ही देर से आया हो लेकिन जब आया तो ऐसे आया कि उनके पूरे जीवन की मेहनत वसूल हो गई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के सीकर जिले के एक स्कूल में बतौर प्रधानाचार्य तैनात भगीरथ सिंह को उनके पूर्व छात्रों और गांव के लोगों ने मिलकर अल्टो कार गिफ्ट की है। लोगों ने उन्हें यह उपहार उनके अच्छे कामों और छात्रों के लगातार बेहतर प्रदर्शन के प्रयास के लिए दिया है।
कार की चाभी उन्हें इसी रविवार को सीनियर सेकेंडरी स्कूल के परिसर में ही एक सादे समारोह में दी गई। शिक्षक भगीरथ सिंह अपने छात्रों के इस तोहफे से फूले नहीं समा रहे हैं। अपने शिक्षक को पूर्व छात्रों की ओर से दिया गया यह उपहार गुरु-शिष्य परंपरा में एक बार फिर से जान डालने की कोशिश है।
शिक्षक भगीरथ सिंह के जीवन का यह सबसे बड़ा उपहार माना जा रहा है। लेकिन इससे भी बड़ी और रोचक उनके जीवन के संघर्ष की कहानी है। उन्होंने अपने जीवन में बहुत मुश्किल समय भी देखा है।
कभी साइकिल खरीदने के पैसे नहीं थे
शिक्षक भगीरथ सिंह महीचा ने सीकर जिले के धनधन गांव के एक स्कूल में अपने करियर की शुरुआत तीसरी श्रेणी के प्राइमरी टीचर के रूप में की थी। धीरे-धीरे प्रमोशन के बाद वह प्रिंसिपल के पद तक पहुंच गए हैं लेकिन अपने करियर में वे कभी साइकिल तक नहीं खरीद पाए।
उन्होंने बताया कि 1984 में उन्होंने अपना करियर शुरू किया तब स्कूल में 225 छात्र थे। उन्होंने लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया तो 1994 तक छात्रों की संख्या 442 तक हो गई लेकिन स्कूल की सुविधाएं और टीचरों की संख्या में कोई इजाफा नहीं हो सका।
भगीरथ पिछले 20 सालों से धनधन गांव के स्कूल में छात्रों को पढ़ा रहे हैं। उनके इस करियर के बीच कई बार ट्रांसफर भी हुआ और कई अन्य स्कूलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
2004 में उनका ट्रांसफर धनधन गांव में बतौर प्रिंसिपल हुआ जहां से वह अपना शैक्षिक जीवन आरंभ किया था। उनकी खासियत यह है कि उनका ध्यान गरीब तबकों के छात्रों पर ज्यादा होता है।
गरीब छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं
रिपोर्ट के अनुसार महीचा काम करने के घंटों को लेकर बहुत ही सख्त हैं जैसे कि कम ही लोग वैसे होते हैं। वे अनुशासन प्रिय हैं और शालीनता और विनम्रता की पूरी वकालत करते हैं।
लेकिन उनकी सबसे बड़ी खूबी है गरीब छात्रों पर खास ध्यान देना। उन्होंने गरीब वर्ग के छात्रों के लिए विशेष कक्षाओं की व्यवस्था भी कर रखी है।
उनके इस काम से प्रभावित होकर अन्य कई लोग भी गरीबों को मुफ्त पढ़ाने और विशेष कक्षाओं कार्यक्रम से जुड़े हैं जिससे किसी भी छात्र का रिजल्ट कभी खराब नहीं आता।
उनके इस प्रयास का परिणाम आज यह है कि परीक्षाओं में पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत अन्य स्कूलों से काफी ज्यादा है। इस साल विज्ञान वर्ग के 98.70 प्रतिशत और कला वर्ग के 96 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। पास होने वाले ज्यादातर छात्रों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की है।