चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां को आचार संहिता के उल्लंघन पर फिर नोटिस भेजा है। प्रतिबंध के बावजूद आयोग के फैसले की आलोचना तथा चुनावी सभाओं में लिखित भाषण दूसरों से पढ़वाने के मामले में आजम खान को आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी माना गया है।
आयोग ने बुधवार को आजम को भेजे नोटिस में कहा है कि भड़काऊ भाषणों के आधार पर 11 अप्रैल को आपके चुनाव प्रचार में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
इस आदेश पर अमल न करके आपने मीडिया से बातचीत में आयोग के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की।
जवाब दाखिल करने को 25 अप्रैल तक का समय
यही नहीं आयोग को मिली रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंध के बाद भी आपने अपने आपत्तिजनक भाषणों को चुनावी सभाओं में कार्यकर्ताओं से पढ़वाया।
नोटिस में आगे कहा गया है कि आपकी ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ आधारहीन बातें कही गईं। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराना इसका दायित्व है।
आपके भाषणों में दो धार्मिक संप्रदायों के बीच घृणा फैलाने वाला बयान दिया गया। आयोग प्रतिबंध के बाद आपके इन आचरणों को आचार संहिता के विरुद्ध मानता है। आयोग ने आजम खां से 25 अप्रैल शाम पांच बजे तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
चुनाव आयोग के खिलाफ सपाइयों का प्रदर्शन
सपाइयों ने शहर में जुलूस निकालकर एसपी आवास के सामने धरना प्रदर्शन कर पुलिस और चुनाव आयोग की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की।
सपाइयों ने साफ किया कि बूथ कैप्चरिंग मामले में यदि बेगुनाहों को फंसाया गया तो वो सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। साथ ही उन्होंने नगर विकास मंत्री आजम खां पर लगी पाबंदी को हटवाने की मांग की और राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
शहर के दो बूथों पर हुई कैप्चरिंग के मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद सपाइयों का पारा और चढ़ गया है। पुलिस पर बेगुनाहों को फंसाने का आरोप लगाते हुए सपाइयों ने एसपी के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है।