सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसा लगता है कि अमीर लोगों में अंहकार बढ़ रहा है। उनकी नजरों में गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं है।
शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी केरल के उस बिजनेसमैन की जमानत याचिका खारिज करते हुए दी है जिसने अपार्टमेंट का गेट खोलने में देरी करने वाले सिक्योरिटी गार्ड को अपनी गाड़ी से रौंद दिया था। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह मामला इसका जीता जागता उदाहरण है कि अमीर व्यक्तियों का गरीबों के प्रति क्या नजरिया है।
वे गरीबों की जान को क्या समझते हैं। पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि धनी व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो गया है और उसमें घमंड आ गया है। पीठ ने कहा कि आरोपी मोहम्मद निशाम ने गरीब की जान की कोई कीमत नहीं समझी। यह घटना केरल के त्रिसूर की है। गत 29 जनवरी को नशे में धूत निशाम ने अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड चंद्रबोस पर अपनी गाड़ी चढ़ा दी।
सिक्योरिटी गार्ड का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपार्टमेंट का गेट खोलने में देरी की। गेट खोलने में देरी होने से नाराज निशाम ने गार्ड से पहले बहस की। फिर मारपीट की। इतने से भी मन नहीं भरा तो उसने गार्ड को अपनी महंगी गाड़ी से कुचल दिया। 16 फरवरी को गार्ड की मौत हो गई।