कुदरत के कहर से तबाह नेपाल में जनजीवन पटरी पर लाने में भारत युद्धस्तर पर जुटा हुआ है। विनाशकारी भूकंप में करीब चार हजार लोगों की जान गवां चुके मित्र राष्ट्र के लिए बखूबी ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभाते हुए भारत ने मलबे में दबी जिंदगियों को बचाने, घायलों का इलाज करने, भारतीयों सहित अन्य देशों के नागरिकों को निकालने और ध्वस्त हो चुकी आधारभूत संरचनाओं को सुचारु करने के लिए अपनी तमाम ताकत झोंक दी है।
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विदेश की धरती पर भारत के अब तक के इस सबसे बड़े राहत और बचाव अभियान ‘ऑपरेशन मैत्री’ में एनडीआरएफ, वायु सेना और थल सेना के जवान फरिश्ते साबित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी निगरानी में चल रहे राहत अभियान में 13 सैन्य विमान, एयर इंडिया और जेट एयरवेज के तीन विमान, छह एमआई-17 हेलीकॉप्टर, दो आधुनिक हल्के हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। दो एमआई-17 हेलीकॉप्टरों को तैयार रखा गया है।
हेलीकॉप्टर पोखरा और दूर दराज के इलाकों से उड़ान भरने की कोशिश में हैं। सोमवार को इन हेलीकॉप्टरों के जरिये भूकंप के केंद्र वाले इलाके से करीब 350 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। विदेश सचिव एस जयशंकर ने सोमवार शाम प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि भारतीयों के साथ-साथ 30 विदेशी नागरिकों को भी नेपाल से सुरक्षित भारत लाया गया है। एनडीआरएफ की तीन नई टीमें और एसएसबी की टीम 10 एंबुलेंस के साथ काठमांडू पहुंच गई हैं।
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साफ पानी के लिए आरओ प्लांट और ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे गए
त्रिभुवन हवाई अड्डे पर एयर ट्रैफिक बढ़ता देख बस सेवा को और रफ्तार दी जा रही है। जयशंकर के मुताबिक सोमवार को सोनौली से 100, रक्सौल से 35 और उत्तराखंड के महेंद्रगढ़ से 25 बसें नेपाल पहुंचीं। ताकि भारत आने वाले लोगों को हवाई सेवा पर निर्भर नहीं रहना पड़े। जयशंकर ने जानकारी दी कि मेडिकल और सर्जरी की नई टीम के साथ टेंट और कंबल की नई खेप वायुसेना के विमान से भेजी गई है।
साफ पानी के लिए आरओ प्लांट और ऑक्सीजन सिलेंडर भी भेजा गया है। दिक्कत यह है कि सेना के जहाजों को त्रिभुवन हवाई अड्डे के खाली होने का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अभी तक भारत की ओर से 22 टन खाद्यान्न, दो टन दवाइयां और मेडिकल सेवा के लिए जुड़ी चीजें, 50 टन पानी और अन्य जरूरी चीजें भेजी जा चुकी है। इस बीच भूकंप से सबसे बुरी तरह तबाह राजधानी काठमांडू और अन्य इलाकों में अब भी हजारों लोग मलबे के नीचे दबे हैं।
नेपाली पुलिस के प्रवक्ता कमल सिंह बाम ने कहा कि अब तक 3726 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। दूर-दराज के इलाकों में राहतकर्मियों के पहुंचने के साथ यह आंकड़ा पांच हजार को भी पार कर सकता है। हालांकि मीडिया रिपोर्टों में इसे दस हजार तक भी बताया जा रहा है। केवल काठमांडू में अब तक 1053 और सिंधुपालचौक में 875 लोगों की मौत हुई है।
ऑपरेशन मैत्री को और रफ्तार देंगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर शाम उच्चस्तरीय बैठक में ऑपरेशन मैत्री की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने अभियान को और रफ्तार देने व अड़चनों से निपटने के उपायों पर चर्चा की। बैठक में गृहमंत्री, वित्तमंत्री, विदेश मंत्री भी शामिल थे।
011-1078 आपदा हेल्पलाइन नंबर घोषित एनडीआरएफ ने चार डिजिट वाला 011-1078 नंबर राष्ट्रीय हेल्पलाइन के तौर पर खोल दिया है। इस नंबर पर कहीं से भी फोन किया जा सकता है। इसके अलावा राहत के लिए सामान देने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों के लिए मेजर जनरल अनुराग गुप्ता को नोडल व्यक्ति को तौर पर तैनात किया गया है। नेपाल में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए कोई भी शख्स मेजर जनरल गुप्ता से नंबर 8527892258 पर संपर्क कर जा सकता है। इसके लिए ई-मेल ‘आरआईटीयू एट याहू डॉट कॉम’ का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
खराब मौसम और झटके बने अड़चन बार-बार आ रहे भूकंप के झटके और खराब मौसम ऑपरेशन मैत्री में अड़चन पैदा कर रही हैं। खराब मौसम, टूटी सड़कें और काठमांडू के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की भारी आवाजाही से काम में बाधा पहुंच रहा है। इन कारणों से पर्याप्त राहत व बचाव सामग्री के बावजूद एनडीआरएफ और सेना अब तक दूर दराज के इलाकों में कार्रवाई पूरी तरह नहीं शुरू कर पाई है।
सेना नेपाल में मौजूद पूर्व गोरखा सैनिकों की मदद से इन इलाकों में पहुंचने की कोशिश में है। बिजली और तेल की कमी से निबटारे के लिए पावर ग्रिड और इंडियन ऑयल के उच्च अधिकारी भी काठमांडू पहुंच गए हैं। सरकार ने कहा है कि नेपाल के दूर दराज के इलाकों से आ रही खबरें ‘ऑपरेशन मैत्री’ के लिए और बड़ी चुनौती खड़ी कर रही हैं।
युद्ध स्तर पर राहत और बचाव अभियान
एनडीआरएफ की 13 टीमें बचाव और राहत कार्य में लगी हुई है। एक इंजीनियरिंग टास्क फोर्स और 18 मेडिकल यूनिटें भी रवाना की जा चुकी है। एक ड्रॉन विमान भी भेजा गया है। गृह मंत्रालय अतिरिक्त सचिव बीके प्रसाद के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालय टीम 250 हाई फ्रीक्वेंसी वाले वायरलेस सेटों के साथ भी भेजी गई है। बिहार, यूपी और उत्तराखंड की सरकारों ने सीमा से लगे इलाकों में राहत शिविर बनवाया है और नेपाल से लोगों के निकालने के लिए बस सेवा चला रही है।
नेपाल की तबाह हो चुकी संचार व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए संचार विशेषज्ञों को भेजा गया है। करीब 450 प्रशिक्षित जवानों की एनडीआरएफ की टीमें काठमांडू घाटी से करीब 10 से 15 किमी दूर सीतापैला, महाराजगंज, महेश्वरी और गंगाभाजट में राहत और बचाव के काम में जुटी है। काठमांडू में कैंप कर रहे एनडीआरएफ के महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया की उनके जवानों की एक टीम त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी तैनात है जो भारतीय लोगों को स्वदेश भेजने में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों को सहयोग कर रही है।
5400 भारतीय निकाले गए नेपाल में फंसे 5400 भारतीयों को निकाला जा चुका है। इसके साथ ही वहां पर फंसे विदेशी नागरिक जो भारत आना चाहते हैं, उनको फ्री वीजा दिया जा रहा है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में बताया कि भारतीयों को निकालने के लिए प्रतिकूल मौसम के बावजूद रविवार को पूरी रात उड़ानें भरी गई। काठमांडू में दूतावास के कर्मचारी बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। वहां स्वदेश आने वालों की लंबी लाइन लगी है। 10 से 20 हजार लोग फंसे हैं।
पश्चिम बंगाल और बिहार में सोमवार को एक बार फिर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। शाम 6:06 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 आंकी गई। बार-बार आ रहे भूकंप के झटकों की वजह से दोनों राज्यों में दहशत का माहौल है।
पीएम और सांसद देंगे एक माह का वेतन नेपाल में राहत कार्यों के लिए लोकसभा के सभी सांसद अपना एक माह का वेतन देंगे वहीं पीएम मोदी खुद अपना एक महीने का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवाएंगे।
देश में मरने वालों की संख्या 72 हुई गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भूकंप से देश में अब तक 72 लोगों की मौत हुई है। इसमें से सबसे अधिक मौतें 56 बिहार में, 12 यूपी में, तीन पश्चिम बंगाल में और एक राजस्थान में हुई हैं।
80 खास दवाओं की भारी किल्लत आपदा में आठ हजार से अधिक लोगों के घायल होने के कारण नेपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। दवाइयों के साथ टेंट, कंबल, दरी और खाने-पीने की सूखी चीजों की भारी किल्लत है। नेपाल सरकार के मुख्य सचिव लीलामणि पौडेल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत राहत पहुंचाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि हमें 80 विभिन्न दवाइयों की तत्काल जरूरत है। हमें हड्डी रोग विशेषज्ञों, नाड़ी विशेषज्ञों, बेहोशी के डॉक्टरों, सर्जनों और पैरा मेडिकल स्टाफ की जरूरत है।
काठमांडू से रोड संपर्क बहाल भूकंप से आए जमीन खिसकने के बाद काठमांडू को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर जारी अवरोध सोमवार को हटा लिया गया। इसके बाद कई दिनों से फंसी हजारों गाड़ियां यहां से निकलने लगी है।