प्रलय का सामना कर रहे चेन्नई में बाढ़ का पानी उतरने के बीच एक दर्दनाक घटना घट गई है। राजधानी के एक बड़े निजी अस्पताल एमआईओटी के जेनरेटर रूम में बाढ़ का पानी भरने और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने की वजह से बुधवार को 18 मरीजों की मौत का मामला सामने आया है।
हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं निजी अस्पताल ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। अपुष्ट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी रोयापेताह अस्पताल में बाढ़ या बारिश की वजह से मारे गए 30 से अधिक शव लाए गए हैं।
इस बीच प्रभावित इलाकों में पानी घटने लगा है और लोग तबाह हो चुकी जिंदगी को संवारने में जुट गए हैं। हालांकि, शुक्रवार को चेन्नई में रुक-रुक हुई बारिश से लोगों में बाढ़ का खौफ कायम रहा। मौसम विभाग ने कहा कि अगले 24 घंटे में चेन्नई में हल्की बारिश होगी, लेकिन पुडुचेरी में तेज बारिश जारी रहेगी।
जलस्तर घटा
बुरी तरह से प्रभावित इलाकों में लाखों लोग पीने के पानी, बिजली, दूध और
अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कमी से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में राज्य
सरकार के मंत्रियों और प्रशासन को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा,
लेकिन राज्य सरकार ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि राहत और बचाव कार्य
पूरी क्षमता से चलाया जा रहा है।
कई अहम सड़कों पर यातायात शुरू हो गया है।
अय्यर और कोउम नदियों का जलस्तर भी घट गया है। चेंबारंबक्कम झील से छोड़े
जा रहे पानी में भी कमी आई है। हालांकि शुक्रवार देर शाम झील में दरार
पड़ने की अफवाह से अफरातफरी मच गई। इस बीच चेन्नई एयरपोर्ट को भी उड़ान के
लिए तकनीकी रूप से हरी झंडी मिल गई है। शनिवार से दिन में आंशिक उड़ान शुरू
की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक जिस एमआईओटी अस्पताल में 18 मरीजों के
मारे जाने की दर्दनाक घटना हुई वह मनापक्कनम में अय्यर नदी के तट पर स्थित
है।
सभी अस्पताल हैं खुले
अस्पताल परिसर में पानी भरा हुआ है। बिजली की आपूर्ति ठप होने की वजह
से अस्पताल में जेनरेटर चलाया जा रहा था। मारे गए मरीजों के परिजनों ने
बताया कि कुछ मरीज वेंटिलेटर पर थे और जेनरेटर रूम में पानी भर जाने की वजह
से ऑक्सीजन की आपूर्ति लगातार नहीं हो पाई। इस कारण संभवत: उनकी मौत हो
गई।
इस बारे राज्य के स्वास्थ्य सचिव जे. राधाकृष्णन ने कहा कि अस्पताल के
आईसीयू में 75 मरीज थे, जिसमें से 57 को वहां से हटा दिया गया था। बाकी
मरीजों की पिछले दो-तीन दिनों में मौत हो गई। मरीजों की मौत के लिए बिजली
की आपूर्ति बाधित होने का बहाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार मामले
की जांच कर रही है।
एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही होता तो
आईसीयू में भर्ती सभी मरीजों की मौत हो जाती। अस्पताल से 575 मरीजों को
बाहर निकाला गया। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि उक्त अस्पताल में बिजली
नहीं थी और वहां बाढ़ का पानी भर गया था। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी
अस्पताल खुले हैं और वहां मरीजों का इलाज चल रहा है। वहां पर सभी अस्पतालों
के मरीजों को जरूरत के हिसाब से भर्ती कराया गया है।