उस घटना और पीड़िता की हालत के बारे में सोचकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पीड़िता का इलाज करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि ऐसी घटना उन लोगों ने अपने 20 से 30 वर्ष के चिकित्सीय पेशे में कभी नहीं देखी।
डॉक्टरों का कहना है कि वे उस घटना को बार-बार याद नहीं करना चाहते हैं। पीड़िता के इलाज में शामिल रहे डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि पीड़िता के साहस और सकारात्मक सोच की वजह से डॉक्टरों को इलाज करने में मदद मिली। अपनी हिम्मत की वजह से ही वह कई दिन तक मौत से लड़ी।
क्या थे चिकित्सकीय सबूत?
आरोपियों को सजा दिलाने के लिए यूं तो काफी सबूत और गवाह थे लेकिन पहली बार दुष्कर्म के मामले में आरोपियों, पीड़िता व घायल युवक के खून की जांच के लिए डीएनए टेस्ट कराए गए, जो अदालत में बड़े सबूत बने।
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आरोपियों के दांतों की जांच भी सफदरजंग अस्पताल में कराई गई, क्योंकि पीड़िता के शरीर पर कई जगह दांत से काटने के निशान थे। फोरेंसिक जांच के अलावा पीड़ित युवती के खून से सने कपड़ों और आरोपियों का मेडिको लीगल केस (एमएलसी) भी सबूत बना।
• चेहरे पर दांत से काटने के निशान
• छाती और गले पर नाखून से काटने के निशान
• पेट पर नुकीली वस्तु से गंभीर चोट
• प्राइवेट पार्ट्स पर तेज चोट के निशान
• लोहे की रॉड शरीर के अंदर डाली
• बच्चेदानी का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ था
• रॉड की वजह से छोटी आंत पूरी तरह से बाहर आ गई थी
• बड़ी आंत का भी काफी हिस्सा प्रभावित हुआ
• कमर के पास धारदार हथियार से कट के निशान
• पीठ और पैर में मामूली चोट के निशान
बेकाबू था संक्रमण
पीड़िता का इलाज करने वाले चिकित्सकों में शामिल डॉ. पीके वर्मा और डॉ. राजकुमार ने कहा कि उसके पूरे शरीर में संक्रमण फैल गया था। इसको काबू में करना बड़ी चुनौती थी।
शुरुआती दौर में संक्रमण को कुछ हद तक काबू भी किया गया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया स्थिति विकट होती गई। बाद में युवती को बचा पाना मुश्किल हो गया था। भारत में पांच सर्जरी करने के बाद 26 दिसंबर की रात उसको एयर एंबुलेंस से सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल भेजा गया।
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रास्ते में ही पीड़िता की हालत और खराब हो गई थी। नब्ज की गति और ब्लड प्रेशर करीब तीन मिनट के लिए बंद हो गया था।
प्लेन में ही उसको हृदय आघात भी पहुंचा, जिसके बाद प्लेन में ही डॉक्टरों ने उसके हृदय में आरटेरियल लाइन डाली थी। 29 दिसंबर की देर रात करीब सबा दो बजे माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में युवती की मौत हो गई।
आज भी सिहर उठता है दोस्त
वसंत विहार गैंगरेप के चश्मदीद और बिटिया के दोस्त अवनींद्र पांडेय आज भी उस घटना की याद आने से सिहर जाते हैं। उस घटना पर बात करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं। उन्हें इस बात का मलाल है कि जिसे दोस्त कहा, उसे दरिंदों से बचा नहीं पाया।
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अवनींद्र का कहना है, ‘हर पल एक दर्द सताता है कि दोस्ती अधूरी रह गई। दोस्त का हर पल साथ देने का वादा टूट गया। काश, मैं उसे बचा पाता। कहीं न कहीं दिल में हर पल अपराध बोध होता है कि राजधानी पहले जागी होती तो वो हमारे बीच होती।’
अवनींद्र का मानना है, ‘इंसाफ मिला, पर अधूरा। हालांकि एक सुकून है कि कम से कम उसके बहाने ही सही देश के कानून में कुछ बदलाव व जनता में जागरुकता तो आई। लेकिन महज 5 से 10 फीसदी ही बदलाव आया है। पिछले एक साल से मैं कोई फिल्म देखने नहीं जाता। क्योंकि वो याद आती है।’