कानपुर सेंट्रल के रेलवे स्टेशन पर एक बंदर अपने साथी बंदर की जान बचाने के लिए डॉक्टर बन गया। साथी बंदर ने अपने दूसरे साथी की जान बचाने के लिए मौके पर ही शॉक ट्रीटमेंट दिए और उसको बचा लिया।
दरअसल स्टेशन पर एक हाईटेंशन तार से जोर का झटका खाने के बाद एक बंदर जमीन पर गिर गया था। बंदर ने अपने साथी की जान बचाने के लिए जो कुछ किया उसने सबको दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
बंदर को करंट लगने के बाद वहां मौजूद लोगों को लगा कि बंदर मर गया होगा, लेकिन साथी बंदर यह मानने को तैयार नहीं था। अपने साथी की जान बचाने के लिए और उसे होश में लाने के लिए वह जी-जान से जुट जाता है और वो उसे बार बार पानी में डुबकियां लगवाता है ताकि उसे होश आ जाए। वो कभी उसके मुंह पर काटता है तो कभी उसके शरीर पर, ताकि उस बंदर को होश आ जाए। मेडिकल साइंस की भाषा में साथी बंदर उस बंदर को बचाने के लिए जो कुछ कर रहा था उसे शॉक ट्रीटमेंट कहा जाता है। बंदर की यह कोशिश एक घंटे तक चलती रही।
अपने साथी को बचाने के लिए जब एक बंदर यह सब कुछ कर रहा था उस वक्त उसकी मदद करने कोई नहीं आया जबकि मौके पर काफी सारे लोग मौजूद थे। लोग अब भी यही सोच रहे थे कि बंदर मर चुका है। लेकिन साथी बंदर यह मानने को तैयार नहीं था कि उसका दूसरा साथी मर चुका है। आखिरकार साथी बंदर की मेहनत रंग लाती है। बेसुध बंदर को होश आता है और उसकी रूक चुकी धड़कनों को रफ्तार मिल जाती है और उसकी जान बच जाती है।