दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा ने आम आदमी पार्टी के चंदे में गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। भाजपा ने उस मुद्दे को जमकर उछाला और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया था। हालांकि नतीजे उसकी उम्मीदों उलट आए थे और वह औंधे मुंह गिरी।
एसोशिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिले चंदों को विश्लेषण किया है। विश्लेषण के नतीजे पार्टी के जख्मों पर नमक छिड़क सकते हैं। एडीआर ने कहा है कि लोकसभा चुनावों में भाजपा को जो चंदे मिले थे, उसमें भी कई गड़बड़ियां थी।
एडीआर ने कहा है भाजपा को कई चंदे एक ही चेक और डिमांड ट्राफ्ट नंबर से दिए गए। चार लाख रुपए से अधिक का चंदा अज्ञात श्रोतों से आया।
दो अलग-अलग चंदों में एक ही चेक या डीडी
भाजपा द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए चंदे के आंकड़ों के मुताबिक, कम से कम आधा दर्जन लेनदेन ऐसे थे, जिनमें गड़बड़ियां थीं। दो अलग-अलग चंदों में एक ही चेक या डिमांड ड्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया।
उदाहरण के लिए एटूजेड ऑनलाइन सर्विसेज, जिसने अपना पता टेक पार्क, टॉवर इ, एयरपोर्ट रोड, येरवदा, पुणे दर्ज कराया था, उसने डिमांड ड्राफ्ट नंबर 957 से भाजपा को 84 लाख रुपए चंदा दिया। उसी डिमांड ड्राफ्ट नंबर से जुमाना गुलाम वाहनवती नाम के एक व्यक्ति ने भाजपा को 20 लाख रुपए का चंदा दिया।
वाहनवती का पता 21, बकले रोड, नाथालाल पारेख मार्ग, कोलबा, मुंबई दर्ज था।
चंदा देने वालों का नाम और पता ही स्पष्ट नहीं
बिलकुल ऐसे ही रवि डेवलपर्स और रवि डेवलपमेंट्स नाम से 7.5-7.5 लाख रुपए के चंदे भाजपा को दिए गए, लेकिन दोनों चंदों का चेक नंबर 793956 ही था। इन दोनों ने अपना पैन नंबर और पता भी नहीं दिया।
प्रवीण कुमार ने व्यक्तिगत स्तर पर भाजपा के खाते में 5 लाख रुपए का चंदा दिया। 5 लाख की रकम देने के लिन दो बार ट्रांजेक्शन किया गया, हालांकि दोनों बार एक ही चेक नंबर 826592 का इस्तेमाल किया गया। कुमार का कॉटेक्ट डिटेल भी नहीं दिया गया था।
ऐसे चंदे भी आए, जिनमें देने वालों ने अपना नाम और पता ही स्पष्ट नहीं किया। एक चंदे में देने वाले का नाम VV था, जबकि एक अन्य चंदे में देने वाले का नाम BJP।
हालांकि भाजपा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये गड़बड़िया टाइपिंग के कारण हुई रही होंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का एकाउंट डिपार्टमेंट मामले की जांच करेगा।