गोकशी के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले दिलशाद भारती की गो तस्करों द्वारा मारी गई गोली से बृहस्पतिवार शाम मौत हो गई। उनके इस विरोध के चलते छह गो तस्करों ने पिछले साल 27 जून को सिर पर गोली मार दी थी। तभी से वो अस्पताल में भर्ती थे। दिलशाद की मौत की सूचना पर परिजनों ही नहीं पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। वहीं परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा भी किया। हालात को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस से लेकर लिसाड़ीगेट तक पुलिस तैनात रही।
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लिसाड़ीगेट क्षेत्र के नीचा सद्दीकनगर निवासी दिलशाद भारती (35) पुत्र शकील अहमद को गोली मारने के मामले में दानिश, हाजी छोटू, दिलशाद, नदीम, इस्लामुद्दीन और महराज को नामजद किया गया था। परिजनों का कहना था कि दिलशाद लिसाड़ीगेट क्षेत्र में होने वाली गोकशी का विरोध करता था। इसके चलते उसे गोली मारी गई थी। परिजन सात महीने से दिलशाद का मेरठ से लेकर दिल्ली तक इलाज करा रहे थे।
वर्तमान में वह मेरठ में बागपत रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती था। यहां शाम 6:40 बजे उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने इस बारे में परिजनों को बताया तो कोहराम मच गया। मौत की जानकारी होने पर पुलिस महकमे में भी खलबली मच गई। आनन फानन में सीओ कोतवाली रूपेश सिंह टीपीनगर एसओ और लिसाड़ीगेट एसओ के साथ अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर अस्पताल में हंगामा शुरू किया तो पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात
दिलशाद की मौत के बाद लिसाड़ीगेट में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात कर दी गई। पुलिस को अंदेशा है कि दिलशाद के परिजन शव को सड़क पर रखकर जाम लगा सकते हैं। परिजनों में पुलिस के प्रति जबरदस्त आक्रोश है। देर रात तक पुलिस दिलशाद के पोस्टमार्टम कराने में जुटी हुई थी।
'मेरा भाई शहीद हुआ है'
हम मुसलमान हैं, लेकिन गोरक्षा करना हमारा धर्म है। मेरे भाई ने गोरक्षा करते-करते अपनी जान दे दी। गोवंश को बचाना उसने अपना मकसद बना लिया था। इसीलिए उसने शादी भी नहीं की थी। गोकशी का धंधा मंदा पड़ने लगा तो पुलिस ने ही आरोपियों से मिलकर दिलशाद को गोली मरवाई। दिलशाद ने जान का खतरा बताकर पुलिस से सुरक्षा भी मांगी थी। ये आरोप दिलशाद भारती के भाइयों ने पुलिस पर लगाए हैं।
दिलशाद की मौत की सूचना पर तीनों भाई आरिफ, आसिफ और इमरान रोते बिलखते अस्पताल पहुंचे। भाई का मुर्दा चेहरा देखकर तीनों का गुस्सा फूट पड़ा और जमकर पुलिस पर भड़ास निकाली। अस्पताल में मौजूद पुलिस अपना सिर नीचे झुकाकर पोस्टमार्टम के कागज बनाने में जुटी रही। पुलिस ने शव भेजकर दिलशाद के भाइयों को समझाया कि आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। इमरान ने कहा कि मेरा भाई गोरक्षा में शहीद हुआ है, उसको पुलिस ने मरवाया है। गोहत्या करने वालों का विरोध करने पर पुलिस का धंधा बंद होने लगा था। उसको रास्ते से हटवाने के लिए पुलिस ने आरोपियों से मिलकर दिलशाद को गोली मरवाई। दिलशाद ने लिसाड़ीगेट पुलिस को पहले ही जानलेवा हमले का अंदेशा जताकर सुरक्षा मांगी थी।
तीन आरोपी जमानत पर बाहर हैं दिलशाद के भाई इमरान ने बताया कि नामजद आरोपी दानिश, नदीम और दिलशाद कुछ दिन पहले जमानत पर छूटकर बाहर आ गए हैं। मुकदमा वापस न लेने पर आरोपी लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। तीनों भाइयों को जान का खतरा बना हुआ है। पुलिस से सुरक्षा मांगते हैं तो उनको झूठा बताया जाता है। जमानत पर छूटे तीनों आरोपियों को जेल भेजने की मांग उठाई है। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने का आश्वासन दिया है।
सब कुछ लुट गया हमारा पीड़ित परिवार का कहना है कि हमारा तो सब कुछ लुट गया। दिल्ली के बड़े अस्पताल में दिलशाद का इलाज कराया, जिसमें उनके एक करोड़ 15 लाख रुपये खर्च हुए। मकान तक गिरवी रखना पड़ा, बावजूद दिलशाद की जान नहीं बची। 13 जनवरी को दिल्ली के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया तो उसको घर पर ले आए थे। 15 जनवरी को तबीयत खराब होने पर फिर परिजनों ने उसको बागपत रोड स्थित अस्पताल में भर्ती कराया था।
दिलशाद के पास थी मिनी कमेलों की सूची
लिसाड़ीगेट में चल रहे 28 मिनी कमेलों की सूची दिलशाद भारती ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, एसएसपी और थाना पुलिस को सौंपी थी। लगातार कमेलों पर छापामारी से परेशान होकर गोकशी करने वालों ने दिलशाद की हत्या करने की प्लानिंग कर ली थी। गोकशी करने वालों ने चंदा करके भाडे़ के शूटरों से गोली मरवाई थी।
दिलशाद ने गोहत्या करने वालों की सूची बनकर अभियान छेड़ रखा था। दिलशाद के साथ आठ और लोग भी शामिल थे। इसमें पांच मुस्लिम और तीन हिंदू संगठन के कार्यकर्ता थे। 18, 19, 20 व 21 नवंबर और 30 दिसंबर 2013 को दिलशाद की दी गई सूचना पर पुलिस ने छापामारी कर आठ मिनी कमेले पकड़े थे। इनसे गोमांस भी बरामद हुआ था। रियाजुद्दीन और उसके बेटे दानिश ने लिसाड़ीगेट के गली में मांस बेचने की दुकान तक खोल रखी थी।
12 अप्रैल 2014 को दिलशाद ने ऊंचा सद्दीकनगर में रियाजुद्दीन के मिनी कमेले पर छापा डलवाया। यहां से तीन जिंदा गाय और भारी मात्रा में गोमांस मिला था। इसके बाद ही गोकशी करने वालों ने दिलशाद और उसके अभियान में शामिल लोगों की हत्या की साजिश रच ली। दिलशाद और उसके साथियों के घरों में धमकी भरी चिट्ठी भी फेंकी गई।
इसके बाद दिलशाद ने 26 मई 2014 को दस मिनी कमेले पकड़वाए। इसके बाद ही दिलशाद को गोली मार दी गई। इसके बाद भी 10 अगस्त को ऊंचा सद्दीकनगर में आठ कमेले पकड़े गए। एक जनवरी को भी तीन मिनी कमेलों का भंडाफोड़ हुआ। तीन दिन पहले भी रहीसुद्दीन का मिनी कमेला पकड़ा था।
कमेले से पुलिस की भी कमाई लोगों ने आरोप लगाया है कि लिसाड़ीगेट में लगातार गोहत्या होती हैं। शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। पुलिस की साठगांठ के चलते यह धंधा बेरोकटोक चल रहा है। पुलिस को भी हिस्सा जाता है। आरोप लगाया कि दिलशाद के अभियान से भी कुछ पुलिस वालों को परेशानी थी। सच संस्था अध्यक्ष संदीप पहल ने बताया कि गोहत्या की शिकायत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से की जाती है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती।
दिलशाद की मौत की जानकारी लगते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने ‘बदला लो’ का नारा लगाया और आरोपियों के घरों की ओर दौड़ पड़े। उनके हाथों में अवैध हथियार और हाकी डंडे थे। इसकी सूचना पुलिस को लगी तो हड़कंप मच गया। लोगों ने आरोपियों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात पर काबू पाए।
दिलशाद की गोली मारने वाले दानिश, हाजी छोटू, दिलशाद, नदीम, इस्लामुद्दीन और महराज के मकान ऊंचा सद्दीकनगर में हैं। दिलशाद के मरने की बात लिसाड़ीगेट इलाके में आग की तरफ फैल गई। धीरे धीरे मोहल्ले में भीड़ लगने लगी। इसके बाद काफी संख्या में लोग आरोपियों के घर की ओर दौड़ पड़े। इससे पहले उग्र भीड़ आरोपियों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी करती पुलिस पहुंच गई और लोगों को समझाकर शांत कराया। हालात देखते हुए पुलिस अफसरों ने दिलशाद के और आरोपियों के घर पर पुलिस और पीएसी बल तैनात कर दी। पुलिस को अंदेशा है कि इस हत्या को लेकर माहौल खराब हो सकता है।
आरोपियों के परिजनों ने खाली किए घर बवाल की आशंका को देखते हुए आरोपियों के परिजनों ने रातोंरात अपने घर खाली कर दिए। पुलिस ने उनको रिश्तेदारों के यहां रहने की सलाह दी है। हालांकि दो आरोपियों के परिजनों ने घर में ही रहने की पुलिस से बात की है।