पार्टी कार्यालयों के अंदर चुनाव प्रचार सामग्री की दुकानों सन्नाटा है। राजद कार्यालय परिसर में लगी कृष्णा इंटरप्राइजेज की दुकान में अशोक सिंह अखबार पढ़ रहे हैं। जदयू कार्यालय में लगी शांति प्रिंटर्स की दुकान में बिक्रम सिंह मोबाइल पर इंटरनेट चला रहे हैं।
यह पूछने पर कि इस बार बाजार कैसा है, बिक्रम कान से ईयर फोन हटाते हुए उत्तर देते हैं, सर सब कुछ हाईटेक हो गया है। देख ही रहे हैं आप जैसे लोग ही यहां आये हैं। अब तक कोई खास आर्डर कहां मिला है।
बैनर, पोस्टर, झोला, बैच, झंडा सब कुछ दुकान में है, लेकिन मांग के सवाल पर बिक्रम कहते हैं टोपी और झंडा अभी ज्यादा बिक रहे है। जदयू की सामग्रियों पर एक मात्र नीतीश की तस्वीर ही दिख रही है, शरद कहीं नहीं दिखे।
लाखों की चुनाव सामग्री बेकार
दुकान में ललन सिंह और संजय झा जैसे एक दो उम्मीदवारों के पोस्टर दिखे, बाकी टाई पिन और सारी पिन जरूर तीर आकार की दिखाई दीं, लेकिन उस पर किसी नेता की तस्वीर नहीं दिखी। वैसे इस बार तो लाखों की प्रचार सामग्री चुनाव से पूर्व ही किसी काम की नहीं रही।
राजद कार्यालय में लालू और पासवान की तस्वीरों वाले पोस्टर दिखाते हुए अशोक सिंह कहते हैं कि 8 से 10 लाख रुपये की सामग्री बेकार हो गयी। दोनों क्षेत्रीय दलों के लिए सामग्रियां बनाने वाले कहते हैं कि गठबंधन टूटने के कारण हम लोगों की कमर टूट गयी, ऊपर से रही सही कसर यह हाईटेक प्रचार ने पूरी कर दी है।
दाम बढ़ने पर सफाई देते हुए अशोक कहते हैं कि सामग्रियों के दाम जरूर 10 से 15 फीसदी तक बढ़े हैं, लेकिन इससे केवल महंगाई की भरपाई हो पाएगी, हमारा यह घाटा नहीं पट पाएगा। अशोक वैसे मानते हैं कि हाईटेक हो चुके प्रचार में भी परंपरागत प्रचार सामग्रियों की अपनी उपयोगिता है।
नेताओं छाप वाला मोबाइल कवर और घड़ी की मांग
पिछली बार 50 लाख तक का माल बिका था, इस बार हालात बहुत बेहतर नहीं है। इसी को देखते हुए परंपरागत प्रचार सामग्रियों में भी नये नये आइटम लाये जा रहे हैं। अशोक सिंह मोबाइल कवर दिखाते हुए कहते हैं कि इस बार यह नया आइटम है।
वहीं बिक्रम सिंह कहते हैं कि नीतीश की तस्वीरों वाली घड़ी आ रही है, देखते हैं उसकी मांग कितनी होती है। ऑडियो और वीडियो जैसे प्रचार पर दोनों कहते हैं कि उसकी मांग है, लेकिन ऑर्डर का इंतजार है।
ऑडियो करीब 6 हजार रुपये तक में तैयार हो जाता है। जिसमें गाने और नारों के साथ उम्मीदवार का भाषण होता है।
भाजपा-कांग्रेस दिल्ली के भरोसे
कांग्रेस का प्रचार सामग्री इसबार भी दिल्ली भरोसे है और स्थानीय स्तर पर कोई खास बाजार नहीं है। कांग्रेस की तरह ही भाजपा कार्यालय में भी सामग्री की कोई दुकान नहीं है। इस मामले में भाजपा भी दिल्ली पर आश्रित है।
भाजपा कार्यालय में बड़ी संख्या में नमो रथ यह बता रहे थे कि पार्टी में प्रचार का तरीका बदल चुका है। बड़ी पार्टियां चाहे प्रचार का तरीका कितना भी हाईटेक कर लें, लेकिन छोटे और मझोले दल आज भी इन्हीं बैनरों और पोस्टरों से जनता तक पहुंच रहे हैं।
एके ट्रडर्स में छप रहे ‘आप’ के पोस्टर और वाम दलों के कार्यालय में पोस्टर तैयार करते कैडर यह उम्मीद दिला रहे हैं कि प्रचार के जो भी नये द्वार खुले, पोस्टर वार तो होगा ही।