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नायाब रिसर्च में लगा यूपी का लाल, कैंब्रिज ने माना लोहा

Mon, 12 Aug 2013 03:40 PM IST
उन्नाव/प्रशांत दीक्षित
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वह दिन दूर नहीं जब आप अपनी एलसीडी टीवी को फोल्ड कर कहीं भी ले जा सकेंगे। दुनिया को चौंका देने वाला यह शोध कर रहे हैं उन्नाव के प्रतिभाशाली युवा धर्मेंद्र प्रताप सिंह।
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इसके लिए लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने उन्हें बेस्ट रिसर्चर का अवार्ड देकर उनकी प्रतिभा को नई पहचान दी है।

उन्नाव जिले के नवाबगंज विकासखंड के छोटे से गांव सराय जोगा में पैदा हुए धर्मेंद्र ने वर्ष 2009 में एलसीडी (लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले) पर लखनऊ विश्वविद्यालय में शोध शुरू किया। फिजिक्स के अध्येता धर्मेंद्र का यह शोध वर्ष 2014 में पूरा हो जाएगा।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने 26 जून से छह जुलाई 13 तक पूरे विश्व से रिसर्च करने वालों को अपना रिसर्च प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने का आमंत्रण दिया था। काउंसिल फार साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) की ओर से धर्मेंद्र प्रताप सिंह को भी यह अवसर मिला। उनके शोध को सर्वश्रेष्ठ शोध घोषित करते हुए वहां उन्हें सम्मानित किया गया।
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महेंद्र कुमार मिश्र इंटर कालेज के प्रधानाचार्य यदुनाथ सिंह के बेटे धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नवाबगंज के सरस्वती शिशु मंदिर में हासिल की।

लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीएससी और एमएससी की। अब वे फिजिक्स में पीएचडी कर रहे हैं। माता कमला देवी गृहणी हैं। छोटा भाई धीरेंद्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। बड़ी बहन नीलम टीचर हैं। छोटी बहन निकेता पीसीएस की तैयारी कर रही हैं।

नरेंद्र भदौरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल सोसाइटी के चेयरमैन नरेंद्र भदौरिया कहते हैं धर्मेंद्र पहले से ही पढ़ने में बहुत तेज थे। उनकी प्रतिभा अलग ही दिखती थी।

एलसीडी ग्लॉस के बीच में लिक्विड क्रिस्टल होने के कारण इसे फोल्ड नहीं किया जा सकता है। इसी पर धर्मेंद्र शोध कर रहे हैं। हालांकि उनके अलावा जापान और साउथ कोरिया में भी इस पर शोध चल रहा है।
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धर्मेंद्र के शोध की खासियत
धर्मेंद्र ने एलसीडी में लिक्विड क्रिस्टल की जगह ग्रेफीन का इस्तेमाल किया। ग्रेफीन के लचीला होने के कारण एलसीडी को फोल्ड किया जा सकता है।

साथ ही ग्रेफीन के इस्तेमाल से पिक्चर क्वालिटी पर भी कोई असर नहीं पड़ता बल्कि क्वालिटी और ठीक हो जाती है।
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