द सेंटर फॉर पीआईएल (जन हित याचिका) नाम के एक एनजीओ ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली और तमिलनाडु सरकार के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में दोनों सरकारों पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से राज्यों के फंड से किए जाने वाले विज्ञापन को लेकर जारी आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
मिंट में छपी खबर के मुताबिक दिल्ली सरकार ने 2015-16 में विज्ञापन पर होने वाले खर्च के लिए 526 करोड़ रुपए की राशि रखी है, जबकि 2014-15 में यह राशि मात्र 23.7 करोड़ रुपए थी।
इतना ही नहीं, 2013-14 में ये राशि 25 करोड़ रुपए, 2012-13 में 24.9 करोड़ रुपए और 2011-12 में 27.6 करोड़ रुपए थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि केजरीवाल सरकार राज्य के पैसों से विज्ञापन करके अपनी ताकत दिखाना चाह रही है।