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शिकायतों का ‘डंपिंग स्टेशन’ बना मोदी का 'मिनी पीएमओ'

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काशीवासियों की बड़ी उम्मीदों का केंद्र बना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जनसंपर्क कार्यालय अपने उद्देश्य में फेल होता नजर आ रहा है। कैबिनेट मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों तक की पूरी फौज उतारने के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी।
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फरियादी आते हैं, कार्यालय पर अपना दुखड़ा रोते हैं और चले जाते हैं, मगर उनके प्रार्थना पत्रों का निबटारा नहीं होता। यही वजह है कि ‘मिनी पीएमओ’ के रूप में प्रचारित किया गया वाराणसी के सांसद का यह दफ्तर शिकायतों का ‘डंपिंग स्टेशन’ बनकर रह गया है। फरियादियों की संख्या गिरकर 25 फीसदी तक पहुंच जाना आखिर और क्या दर्शाता है।

हालांकि अधिकांश शिकायतें राज्य के विभागों से संबंधित होती हैं। जनसंपर्क कार्यालय पर जनता की समस्याओं को सुनने और उसका निराकरण कराने के लिए बकायदा लोगों की नियुक्ति की गई है। इन्हें इस काम के लिए वेतन भी दिया जाता है।
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प्रधान से लेकर पीएम तक गुहार, पर....

तारानगर कॉलोनी (छित्तूपुर) में सड़क निर्माण की मांग लेकर लोग एक साल से आंदोलन कर रहे हैं। प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं, मगर नतीजा सिफर।

पीएम से मिले कॉलोनीवासी राधेश्याम विश्वकर्मा को पीएम ने खुद आश्वस्त किया था कि सड़क का कायाकल्प हो जाएगा, मगर उस बात को भी दस महीने होने को आए। मामला जस का तस है।

किरहिया प्रकरण में हुई किरकिरी
पिछले दिनों किरहिया के लोग पानी की समस्या को लेकर पीएम के जनसंपर्क कार्यालय पहुंचे थे। उनकी समस्या सुननी तो दूर पुलिस को बुलाकर सभी को गिरफ्तार करा दिया गया।

बाद में कांग्रेस विधायक अजय राय ने सभी पीड़ितों की जमानत कराई और जल निगम और जलकल के अधिकारियों से मिलकर किरहिया में शुद्ध पानी की आपूर्ति शुरू कराई। किरहिया प्रकरण को लेकर ‘मिनी पीएमओ’ की खूब किरकिरी हुई।

निस्तारण के सरकारी दावे-हकीकत

गुहार लगाने वाले ज्यादातर लोगों की समस्या सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सफाई को लेकर है।

रवींद्रपुरी से आने वाली शिकायतें नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त कार्यालय होते हुए विभागाध्यक्षों के पास पहुंचती हैं। नगर निगम के एक कर्मी ने बताया अब शिकायतों में कमी आई है।

इसके प्रभारी एडीएम आपूर्ति केएन उपाध्याय ने बताया कि अब तक आई 237 में से 221 शिकायतों का समाधान हो गया है। बाकी का समाधान करने के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया है।

हकीकत यह है कि भुलेटन के विनोद कसेरा के क्षेत्र में पानी की आपूर्ति, रामनगर के पार्षद विनोद कुमार सिंह के क्षेत्र में जलनिकासी का समाधान अब तक नहीं हुआ।

पीएम के संसदीय कार्यालय में कोई कुछ नहीं बताता

इसके अलावा धन के अभाव में छित्तूपुर के प्रभुनाथ की शिकायत पर सड़क खड़ंजा निर्माण नहीं कराया गया।

मौलवी बाग के लाल बहादुर चौरसिया ने सीवर समस्या की शिकायत पीएम के संसदीय कार्यालय में की थी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी केवल एक बार सफाई करके चले गए। जब बारिश होती है तब सीवर ओवरफ्लो करने लगता है।

कहने को तो यह सांसद नरेंद्र मोदी का जनसंपर्क कार्यालय है मगर इस दफ्तर में चलती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की है। जितने भी स्टाफ यहां तैनात है, सभी संघ की पृष्ठभूमि से हैं। उनके कामकाज का तरीका भी संघ की तरह ही है।
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इन शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई

कामकाज में इतनी गोपनीयता बरती जाती है कि फरियादी छोड़िए, मीडिया को भी यह कार्यालय जानकारी देने से परहेज रखता है। पिछले साल भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री राममाधव यहां आए थे। कार्यालय के कामकाज में पारदर्शिता के लिए उन्होंने सबकुछ ऑनलाइन करने की बात कही थी, मगर एक साल बाद भी सब कुछ पहले जैसा ही चल रहा है। यहां कोई इस पर बोलने को भी तैयार नहीं है।

छावनी क्षेत्र स्थित करिअप्पा मार्ग को खोलने अथवा उसका विकल्प देने की मांग को लेकर छावनी पार्षद शैलेंद्र सिंह अब तक पांच दफा पीएम के जनसंपर्क कार्यालय पर पत्र दे चुके हैं। कैंट की रक्षा संपदा की 160 एकड़ जमीन पर आज भी तमाम लोग अवैध रूप से काबिज हैं।

शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर हर्षनाथ सिंह के बेटे की फरवरी में अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर हत्या कर दी। हत्याकांड का खुलासा के लिए वे पुलिस से लेकर प्रधानमंत्री के दफ्तर तक का चक्कर काट चुके हैं मगर आज कहीं से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। पीएम के दफ्तर में वे खुद दो बार पत्र दे चुके हैं मगर कुछ नहीं हुआ।
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