दिल्ली के अरबपति व्यवसायी दीपक भारद्वाज की हत्या के लिए उसी के बेटे नीतेश ने 5 करोड़ की सुपारी दी थी।
सुपारी के इन पैसों में से दो करोड़ वकील सेहरावत, दो करोड़ स्वामी और एक करोड़ रुपये शूटर पुरुषोत्तम को मिलने थे। हालांकि सुपारी की इस रकम में हर कोई ज्यादा रकम हड़पना चाहता था।
वकील ने स्वामी को सुपारी की रकम तीन करोड़ रुपये बताई थी और स्वामी ने सुपारी की रकम दो करोड़ रुपये बताई थी।
हाथ में 50 लाख, सुपारी दे दी पांच करोड़ की
नीतेश के पास 50 लाख रुपये थे, पर उसने पिता दीपक भारद्वाज की हत्या की सुपारी पांच करोड़ रुपये में दे दी। उसने वकील सेहरावत से कहा था कि पिता की हत्या के बाद सारी प्रॉपर्टी उसकी हो जाएगी और वह प्रॉपर्टी को बेचकर बाकी चार करोड़ 50 लाख रुपये दे देगा।
ऐसे बंटे 50 लाख रुपये
50 लाख रुपये : नीतेश ने वकील सेहरावत को 50 लाख रुपये टोकन मनी के रूप में दिए। नीतेश के पास ये पैसे उसके पिता ने रखने के लिए दिए थे।
40 लाख रुपये : वकील सेहरावत ने 40 लाख रुपये अपने पास रख लिए। उसने इन पैसों में से एक नई स्विप्ट कार खरीदी। पुलिस ने इस कार को बरामद कर लिया है। इसके अलावा वकील कुछ पैसे उधारी के दे दिए। पुलिस ने बाकी 30 लाख रुपये इसके कब्जे से बरामद कर लिए हैं।
10 लाख रुपये : वकील सेहरावत ने स्वामी मछिद्रानंद को दस लाख रुपये दिए। हालांकि डीसीपी छाया शर्मा ने बताया कि सेहरावत ने उसे 3.50 से चार लाख रुपये स्वामी को दिए। स्वामी ने दो लाख रुपये शूटर पुरुषोत्तम को दे दिए थे।
2 लाख रुपये : स्वामी मछिद्रानंद ने दस लाख रुपये में दो लाख रुपये शूटर पुरुषोत्तम को दे दिए थे। शूटर ने इनमें से कुछ पैसे सुनील व अमित को दिए दिए थे।
2 हजार रुपये : पुरुषोत्तम राणा ने वारदात के दौरान स्कोडा कार चलाने वाले अमित को गाड़ी चलाने के एवज में 1500 से दो हजार रुपये दिए थे।
वकील ने बेटे को हत्या के लिए उकसाया
गिरफ्तार वकील व प्रॉपर्टी डीलर बलजीत सेहरावत भी कारोबारी दीपक भारद्वाज से खफा था। बलजीत कारोबारी दीपक भारद्वाज के केस लड़ता था और साथ में प्रॉपर्टी के सौदे भी कराता था।
वहीं पिता से दुखी नीतेश ने जब यह बात वकील सेहरावत को बताई तो उसने दीपक भारद्वाज की हत्या के लिए उसे उकसाया। सेहरावत इस बात पर नजर रखता था कि कहीं नीतेश का मन न पलट जाए।
घर से निकाल दिया था बेटे को
दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार कारोबारी दीपक ने करीब पांच-छह महीने पहले नीतेश की बेइज्जत कर दी थी और उसे फार्महाउस से निकाल दिया था।
इसके बाद नीतेश ने अपना रीयल एस्टेट का व्यवसाय किसी के साथ साझेदारी में शुरू किया। इस व्यवसाय के चलते नीतेश और सेहरावत की मुलाकात हुई। सेहरावत नीतेश को प्रॉपर्टी के सौदे कराने लगा था।
इस बात की भनक दीपक भारद्वाज को लग गई थी। इससे कारोबारी दीपक सेहरावत से नाराज हो गया था। वकील कारोबारी को चार से पांच सौदे करा चुका था।
वकील सेहरावत जब अक्तूबर महीने में दलाली के पैसे लेने गया तो कारोबारी भारद्वाज ने उसे भगा दिया था। इस पर सेहरावत ने भी कारोबारी ही हत्या करने की ठान ली। इस दौरान उसे दुखी नीतेश मिल गया। ऐसे में सेहरावत ने कारोबारी की हत्या की साजिश को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया।