इटली से वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद में घोटाले की आंच अब दूसरे रक्षा सौदों तक पहुंचने लगी है। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को थल सेना और वायुसेना के लिए 197 हल्के हेलीकॉप्टरों की खरीद के फैसले को टाल दिया। यह कदम दो कंपनियों के निविदा प्रक्रिया की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोपों के चलते उठाया गया है। इनको चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह शामिल किया जाना था।
सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता वाली रक्षा अभिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में थल और वायुसेना के लिए हल्के हेलीकॉप्टरों की खरीद संबंधी मुद्दे को नहीं उठाया गया। 197 हेलीकॉप्टरों की खरीद की लागत करीब 8000 करोड़ रुपये आंकी गई है।
सूत्रों का कहना है कि सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह के जापान दौरे पर होने की वजह से इस प्रस्ताव पर विचार नहीं किया गया। हालांकि हल्के हेलीकॉप्टरों की खरीद का प्रस्ताव के जांच के दायरे में है। आरोप है कि यूरोपियन यूरोकॉप्टर और रशियन कामोव ने निविदा प्रक्रिया की शर्तों का पालन नहीं किया है। डीएसी ने विशेष तकनीकी निगरानी समिति (एसटीओसी) की रिपोर्ट पर विचार किया। समिति ने खरीद प्रक्रिया में शामिल दो कंपनियों में से एक के प्रस्ताव के अनुरोध की शर्तों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है।
आरोप है कि इटली की अगस्टावेस्टलैंड ने अपने हेलीकॉप्टरों के ढांचे में बदलाव कर दिया। कंपनी ने स्ट्रेचर से घायल सैनिकों को ले जाने में उभार जोड़ दिया है। इसके अलावा रूसी हेलीकॉप्टरों के इंजनों के गैर प्रमाणीकरण के बारे में भी आरोप लगाए गए हैं। इन हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए 2008 में निविदा जारी की गई थी। इसके लिए यूरोकॉप्टर के एएस 350 फेनिक और रशियन कामोव 226 सेर्गेई को चुना गया था जबकि अगस्टावेस्टलैंड शुरुआती चरण में ही बाहर हो गई थी।
हाल ही में इटली में ये आरोप भी सामने आए हैं कि हल्के हेलीकॉप्टरों के परीक्षण प्रक्रिया में शामिल रहे अधिकारियों ने अगस्टावेस्टलैंड से रिश्वत की मांग की थी। खरीद प्रस्ताव को टाले जाने की खबर अगस्टावेस्टलैंड से भारतीय वीवीआईपी के लिए 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद में 352 करोड़ रुपये की रिश्वत दिए जाने के खुलासा के बाद आई है। 3600 करोड़ रुपये का यह सौदा 2010 में इटली की कंपनी से किया गया था।