सूरजकुंड क्राफ्ट मेला अब युवाओं का मेला बनता जा रहा है। वह हस्तशिल्प के बारे में जानकारी लेने नहीं बल्कि गांव-देहात के वाद्ययंत्रों पर यहां थिरकने और दोस्तों के साथ मनोरंजन के लिए आ रहे हैं।
पूरा मेला युवा जोड़ों के लिए डांस फ्लोर बन गया है। मेले में लगभग एक दर्जन नृत्य मंडलियां युवा जोड़ों को नचाने का काम कर रही हैं।
देसी वाद्ययंत्र, उसकी देसी धुन, मॉडर्न युवा और डांस देसी, ऐसा ही मिलाजुला नजारा आप किसी भी डांस पार्टी में युवाओं के नृत्य में देख सकते हैं।
इस समय दिल्ली और उसके आसपास से मेले में हर रोज हजारों की संख्या युवा जोड़े आ रहे हैं। ज्यादातर युवा कॉलेजों में पढ़ते हैं। जो कभी बंचारी की नगाड़ा, कभी बीन तो कभी कालबेलिया पार्टी की धुन पर धमाल मचा रहे हैं।
बंचारी की नगाड़ा पार्टी के कलाकारों और युवाओं में तो बाकायदा नृत्य का मुकाबला हो रहा है। इसमें बंचारी की पार्टी के लड़के मॉडर्न युवक-युवतियों को नृत्य पर छकाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
इसी प्रकार बीन वादकों के बीन की धुन पर युवा जोड़े थिरकना नहीं भूलते। कभी चौपाल पर सिद्धिगोमा, पंथी और कभी देवार कर्मा देखकर भी वे थिरकने लग जाते हैं।
कुल मिलाकर यह मेला युवाओं के लिए डांस फ्लोर बन गया है, जिसमें वे जब जहां चाहें वहां थिरक लेते हैं। मेले में ऐसा लग रहा है कि जैसे फोक डांस और गांवों में प्रचलित धुनों पर नई पीढ़ी फिदा है।