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डीएड वाले भी बन सकेंगे सहायक अध्यापक

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हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में विशिष्ट शिक्षा (डीएड) में डिप्लोमा रखने वाले अभ्यर्थियों को भी दस हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया है।
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इनकी नियुक्ति एनसीटीई द्वारा जारी 23 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 की संशोधित अधिसूचना के तहत की जाएगी। न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की खंडपीठ ने देवेंद्र नारायण पांडेय और 21 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

याचीगण के अधिवक्ता सुधीर कुमार चंद्रौल का कहना था कि याचियों के पास मान्यता प्राप्त डिग्री है। यह डिग्री बीएड और विशिष्ट बीटीसी के समान ही एनसीटीई द्वारा जारी अधिसूचना के तहत मान्य है। इस आधार पर वह सहायक अध्यापक पद हेतु आवेदन करने के लिए अर्ह हैं।
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इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने दस हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए अक्तूबर 2013 में जारी विज्ञापन में इनको शामिल नहीं किया। नियुक्ति प्रक्रिया का शासनादेश 30 जून 2014 को जारी हुआ और वर्तमान में काउंसलिंग चल रही है।

डिप्लोमा धारकों में नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी जो खारिज हो गई। इसके बाद अपील की गई। अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने विशिष्ट शिक्षा में डिप्लोमा रखने वालों को भी शामिल करने की अनुमति दे दी है। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि जारी प्रक्रिया में उपरोक्त याचीगणों को भी शामिल किया जाए।
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स्थायी निवासी की अनिवार्यता को चुनौती

सहायक अध्यापकों की भर्ती में शामिल होने के लिए कम से कम पांच वर्ष से उत्तर प्रदेश में स्थायी रूप से निवास करने की अनिवार्यता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

अभ्यर्थी दिव्या त्रिवेदी ने याचिका दाखिल कर 11 जुलाई 2013 को जारी शासनादेश के प्रावधान 2(2) को चुनौती दी है। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थी का कम से कम पांच वर्ष से उत्तर प्रदेश में स्थायी रूप से निवास हो तथा उसका निवास प्रमाण पत्र भी इतनी ही अवधि से कम का नहीं होना चाहिए।

याची के अधिवक्ता ने इस संबंध में पूर्व में दिए गए कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया गया। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षकारों से इस मामले में चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। यह भी निर्देश दिया है कि 23 और 24 जुलाई को होने वाली काउंसलिंग में याची दिव्या त्रिवेदी को शामिल किया जाए।

याची का कहना था कि वह मूल रूप से उत्तराखंड की निवासी है। 30 नवंबर 2010 को उसका विवाह रामपुर में हुआ। उसके पति रामपुर के स्थायी निवासी हैं इसलिए उसे नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मिलनी चाहिए। अदालत ने याची को काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति देते हुए सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को तत्काल दी जाए।
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