केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री सीपी जोशी ने दोबारा रेल मंत्रालय का अतिरिक्त दायित्व मिलने के बाद कार्यभार ग्रहण करने का कार्यक्रम सोमवार को तय किया है।
लेकिन वहां कई चुनौतियां उनका इंतजार कर रही हैं जिन्हें टालना उनके लिए संभव नहीं होगा।
जोशी को कार्यभार संभालते ही सबसे पहले मंत्रालय के माहौल को दुरुस्त करना होगा क्योंकि वर्तमान में वहां कोई भी जिम्मेदार अफसर बड़ा फैसला लेने को तैयार नहीं है।
जोशी को जल्द से जल्द रेलवे बोर्ड के नये चेयरमैन का नाम भी तय करना होगा क्योंकि 30 जून को वर्तमान चेयरमैन रिटायर होने जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस के यूपीए सरकार से अलग होने के बाद तत्कालीन रेलमंत्री मुकल राय ने जब इस्तीफा दिया था तो सीपी जोशी को पहली बार रेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
बाद में मंत्रिमंडल विस्तार में यह मंत्रालय पवन कुमार बंसल को दे दिया गया। अब बंसल की विदाई के बाद एक बार फिर जोशी को ही रेल मंत्रालय दिए जाने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रेलवे जोशी के पास आगे भी बना रहेगा।
ऐसे में इस बार रेल मंत्रालय की चुनौतियों को वे बाद में आने वाले किसी मंत्री के लिए अनसुलझा नहीं छोड़ सकेंगे।
रेलवे बोर्ड में मेंबर स्टाफ के पद पर महेश कुमार की नियुक्ति में घूस कांड की सीबीआई जांच का दायरा अभी और बढ़ने की उम्मीद है।
वर्तमान सीआरबी विनय कुमार मित्तल, डीजी आरपीएफ पी.के. मेहता, रेलवे बोर्ड के सेक्रेटरी, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक सहित बोर्ड के आधा दर्जन अन्य सीनियर अधिकारियों से सीबीआई जल्द ही पूछताछ कर सकती है।
सीबीआई जांच के दौरान रेलवे के किसी अधिकारी से रेलवे में बड़े फैसला लिए जाने की उम्मीद नहीं है ऐसे में सीपी जोशी को रेल मंत्रालय में अगले कुछ महीने काम करने में काफी मुश्किलें खड़ी होंगी।
यही नहीं अगले कुछ दिनों में रेलवे के वित्त नियंत्रण अधिकारी भी अवकाश प्राप्त करने वाले हैं। रेलमंत्री के रूप में जोशी को तत्काल नये वित्त नियंत्रक की भी नियुक्ति करानी होगी।
दूसरे कार्यकाल में जोशी की क्या प्राथमिकताएं रहेंगी तथा इन चुनौतियों का वे कैसे सामना करेंगे यह जानने के लिए सोमवार तक इंतजार करना होगा।