नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसके लिए यह बात मानना ‘बेहद कठिन’ है कि सहारा समूह ने उसकी कंपनियों को सेबी के पास 24,000 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिए जाने से पहले ही अपने निवेशकों को 22,000 करोड़ रुपये लौटा दिए हैं।
न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस बात पर यकीन करना हमारे लिए बेहद मुश्किल है।
हम इस बात पर तभी यकीन कर सकते हैं, जबकि आप यह प्रदर्शित कर सकें कि सेबी, सैट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई शुरू किए जाने से पहले ही आपने इस बारे में शपथ पत्र दाखिल कर दिया था।
कोर्ट ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब सहारा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने अदालत के सामने यह बात रखी कि सहारा ने 31 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश जारी किए जाने से पहले ही निवेशकों को करीब 22,000 करोड़ रुपये की रकम वापस कर दी है।
इस मामले में सहारा समूह का पक्ष है कि उसकी दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन लि. (एसआईआरईसी), सहारा इंडिया हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लि. (एसएचआईसी) और उसके प्रोमोटर सुब्रत राय व कंपनी के निदेशकों पर अदालत के आदेश की अवमानना का मामला नहीं बनता।