राज्यसभा में माननीय सांसदों के लगातार हंगामे से क्षुब्ध सभापति हामिद अंसारी ने सदस्यों को ‘अराजक’ कह डाला। हालांकि उनकी यह तीखी टिप्पणी सरकार के साथ-साथ विपक्षी दलों को भी नागवार गुजरी है।
सदन शुरू होने के चार मिनट बाद ही रॉबर्ट वाड्रा मामले से लेकर तेलंगाना मुद्दे पर सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। जबकि अंसारी प्रश्नकाल शुरू करना चाहते थे।
पहले भाजपा ने विरोध शुरू किया, फिर कांग्रेस ने जवाबी कार्रवाई की। जबकि आंध्र प्रदेश के सांसद प्रदर्शन करते रहे। भाजपा सदस्य हरियाणा में हुए जमीन के सौदे को लेकर सरकार से जांच कराने की मांग और जवाब मांग रहे थे।
इस बीच कांग्रेस के सदस्यों ने भी अपने जगह पर खड़े होकर विपक्ष के खिलाफ विरोध करना शुरू कर दिया। जबकि टीडीपी के सदस्य अन्य दिनों की तरह ही 'आंध्र प्रदेश बचाओ, लोकतंत्र बचाओ' का नारा बुलंद कर रहे थे।
चौतरफा हंगामे से अंसारी हुए परेशान
चौतरफा हंगामे से परेशान अंसारी ने सदस्यों से नारेबाजी बंद करने और सदन को चलने देने की अपील की। लेकिन इससे हंगामा रुका नहीं। इसके बाद अंसारी का गुस्सा अपने चरम पर जा पहुंचा।
सब घटनाओं ने अंसारी को इस कदर नाराज कर दिया कि उन्होंने कह डाला कि नियम पुस्तिका में लिखे हर नियमों को तोड़ा जा रहा है। क्या सदन को फेडरेशन ऑफ एनार्किस्ट (अराजक तत्वों का महासंघ) बनाना चाहते हैं। अगर ऐसा है तो फिर अलग बात है। इसके बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
पक्ष और विपक्ष हुए लामबंद
राज्यसभा के चेयरमैन द्वारा की गई तीखी टिप्पणी सरकार के साथ प्रमुख विपक्षी दल भाजपा को नागवार गुजरी है। भाजपा ने कड़ा विरोध जताते हुए इस बयान को वापस लेने की मांग की है।
विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने पूरे सदन को ‘अराजक’ कहने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी एक सदस्य को भी ‘अराजक’ कहना असंसदीय है जबकि सभापति ने पूरे सदन को ही ‘अराजक’ कह दिया। संसदीय कार्य मंत्री राजीव शुक्ला ने आसन से कहा कि भाजपा की मांग पर टिप्पणी को बयान से हटा देना चाहिए।
‘नियमों की किताब के प्रत्येक नियम, एक-एक शिष्टाचार का उल्लंघन किया जा रहा है। अगर माननीय सदस्य सदन को अराजक तत्वों का महासंघ बनाना चाहते हैं, तो बात बिल्कुल अलग है।’--हामिद अंसारी, सभापति राज्यसभा