सूर्यास्त के बाद एक महिला को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को फटकार लगाते हुए बांबे हाईकोर्ट ने सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी महिला को हिरासत या फिर गिरफ्तार नहीं करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने इस संदर्भ में महाराष्ट्र के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) और शहर पुलिस कमिश्नर को सभी पुलिस थानों को निर्देश जारी करने को कहा है। जस्टिस एके ओका और एसएस शिंदे की डिवीजनल बेंच ने डीजीपी और सीपी को दो हफ्ते के अंदर दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है।
बेंच ने कहा है कि सभी पुलिस अधिकारियों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 46 (4) को अनिवार्य रूप से पालन करने का आदेश देने दिया जाए। इसके अनुसार, किसी भी अपराध के लिए आरोपी महिला की अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तारी पर रोक है।
इस धारा के मुताबिक, यदि पुलिस किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार करना चाहती है तो इसके लिए उसे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होती है। कोर्ट ने यह निर्देश भारती खानधार द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए जारी किया। भारती को मांटुगा पुलिस स्टेशन ने इलाहाबाद की एक कोर्ट द्वारा जारी गैर जमानती वारंट के चलते गिरफ्तार किया था।
भारती को पुलिस सब इंस्पेक्टर मारुति जाधव ने 13 जून 2007 की शाम को गिरफ्तार किया था। उसे मांटुगा पुलिस स्टेशन में तीन घंटे तक बैठाए रखा गया था। एक अन्य पुलिस सब इंस्पेक्टर अनंत गौरव उसकी गिरफ्तारी दिखाने के लिए कागज तैयार कर रहा था। भारती को अगले दिन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां से उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
इसके बाद पीड़िता ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर गैर कानून ढंग से हिरासत और गिरफ्तार करने के लिए जाधव और गौरव पर कार्रवाई करने की मांग की थी। कमिश्नर की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।