2014 के आम चुनावों में शानदार जीत हासिल करके बीजेपी भले ही दिल्ली की सत्ता हासिल करने में कामयाब रही हो। लेकिन इन चुनावों के बाद बिहार समेत देश के चार राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली।
खासतौर से बात करें बिहार की यहां बीजेपी को जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन ने इन चुनावों में मोदी के मैजिक को मानो फीका साबित कर दिया।
बिहार विधानसभा की दस सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को सिर्फ चार सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। जबकि लालू-नीतीश और कांग्रेस के महागठबंधन को छह सीटें मिली हैं। इनमें आरजेडी ने तीन, जेडीयू ने दो और कांग्रेस ने एक सीट पर जीत हासिल की है।
क्या बरकरार है मोदी का जादू?
पिछले चुनावों पर गौर करें तो बिहार की जिन दस सीटों पर चुनाव हुए उनमें छह सीटें बीजेपी के पास थी। आरजेडी के पास तीन, जेडीयू के पास एक सीट थी। वहीं अगर हाल ही में बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन दस में से आठ सीटों पर आगे रही थी। लेकिन महज तीन महीने के भीतर ही उसे आधी सीटें गंवानी पड़ी है।
बिहार के नतीजे आने के बाद बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी सामने आए। उन्होंने जनता के फैसला पर कहा, "हम जनता के आदेश को कबूल करते हैं। लोकसभा हम जीते, उपचुनाव वो जीते। ये एक-एक की बराबरी हुई।" इसके साथ ही उन्होंने हार के कारणों की समीक्षा की बात कही है।
दूसरी ओर बिहार में नीतीश-लालू गठबंधन के शानदार प्रदर्शन के बाद बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार सामने आए। उन्होंने अपनी जीत को सद्भाव की जीत करार दिया।
नीतीश ने कहा, "मैंने कभी जंगल राज नहीं कहा, हम आतंक राज कहा करते थे। बिहार में कोई जातीय वोट बैंक नहीं है, जनता अपने विवेक से वोट करती है। हम बिहार की जनता के फैसले को सलाम करते हैं।"
बीजेपी ने स्वीकार की हार
नीतीश कुमार ने कहा, "बिहार की जनता ने बांटने की राजनीति को नामंजूर कर दिया है और यहां कि जनता किसी के झांसे में आने वाली नहीं है और इन नतीजों से आगे की दिशा तय होगी।"
दूसरी ओर मुंबई में इलाज के लिए पहुंचे आरजेडी सुप्रीमो ने जीत पर ट्वीट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "ये बिहार की बहुसंख्यक आबादी की जीत है। इस जीत से सामाजिक न्याय के नए एजेंडे एवं विकास के साथ आर्थिक न्याय के युग की शुरुआत होगी।
महागठबंधन की जीत पर जेडीयू के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि उन्हें पहले से पता था कि गठबंधन की जीत होगी। साथ ही उन्होंने इस एजेंडे को देश भर में ले जाने की बात भी कही।
वहीं बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने जनता के फैसले का स्वागत करते हुए हार को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि हार के कारणों की समीक्षा करेंगे, खास तौर से बिहार में हुई हार की जांच होगी।
क्या होगी बीजेपी की रणनीति?
अगर बिहार की सीटों की बात करें तो बीजेपी को सबसे बड़ा नुकसान भागलपुर और छपरा में हुआ क्योंकि ये दोनों सीटें बीजेपी का गढ़ हुआ करती थी। लेकिन इस बार भागलपुर से कांग्रेस उम्मीदवार अजित शर्मा ने जीत हासिल की। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार निभय कुमार चौधरी को हराया।
बीजेपी ने जिन चार सीटों पर जीत हासिल की है। उनमें मोहनिया, हाजीपुर, बांका और नरकटियागंज शामिल है। इनमें मोहनिया की सीट जेडीयू के पास थी। हालांकि जेडीयू ने जाले और परबत्ता सीट पर जीत हासिल की है।
वहीं आरजेडी की बात करें तो उसने मोहिउद्दीन नगर, राजनगर और छपरा की सीट पर जीत हासिल की है।
बिहार के अलावा मध्य प्रदेश और कर्नाटक की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आए हैं। मध्य प्रदेश में दो सीटों पर बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के कब्जे में गई है।
कर्नाटक में कांग्रेस का कमाल
कर्नाटक में हुए तीन सीटों के उपचुनावों में कांग्रेस को दो सीट और बीजेपी को एक सीट हासिल हुई है। बेल्लारी सीट पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है। वहीं शिकारीपुर में बीजेपी को जीत मिली है।
इनके अलावा पंजाब की दो सीटों पर उपचुनाव के नतीजे घोषित किए गए। पंजाब में एक सीट कांग्रेस के खाते में और एक सीट अकाली दल को मिली है।
तलवंडी साबो में अकाली दल के उम्मीदवार जीत मोहिंदर सिंह सिद्धू ने 46642 वोटो से जीत दर्ज की। वहीं पटियाला पूर्व से कांग्रेस उम्मीदवार परनीत कौर ने जीत हासिल किया है। परनीत कौर कांग्रेस के दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी हैं। लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने ये चुनाव लड़ा।