घर वापसी अभियान को लेकर संघ नेतृत्व बेशक अपनी पीठ थपथपा रहा है। लेकिन, धर्मांतरण विवाद को लेकर छिड़ी सियासी बहस ने जम्मू-कश्मीर और झारखंड के चुनावों में भाजपा को उसके ही अनुमान से पीछे रोक दिया।
भाजपा रणनीतिकार दबी जुबान से इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर और झारखंड के विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर विवाद का असर साफ दिखा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार कश्मीर घाटी में भाजपा की स्थिति तीन-चार सीटों पर बेहतर थी, लेकिन धर्मांतरण विवाद के कारण घाटी में पार्टी को वोट नहीं मिले। जो मतदाता भाजपा की तरफ मुखातिब हो रहे थे, वो भी वापस लौट गए।
शायद यही वजह रही कि सत्ता विरोधी रुझान के बावजूद नेकां और कांग्रेस को सम्मानजनक सीटें मिल गईं। दूसरी ओर झारखंड में ईसाई मिशनरियों ने आदिवासियों के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाकर भाजपा के राह में रोड़े अटकाए।
पार्टी नेताओं को उम्मीद थी कि भाजपा अकेले दम पर बहुमत हासिल कर लेगी। लेकिन, उसे रणनीति से चार से पांच सीटें कम हासिल हुईं। धर्मांतरण विवाद से मिशनरियों ने बंट रहे आदिवासी मतों को भाजपा के खिलाफ एकमुश्त मतदान के लिए प्रोत्साहित किया।