दो साल में गंगा में किसी भी नाले का दूषित जल नहीं जाएगा। यह दावा नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के एडिशनल डायरेक्टर चमन लाल का है। उन्होंने शुक्रवार को गंगा और घाटों का निरीक्षण किया। नगर निगम में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दीनापुर और रमना में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 2017 तक बना लिया जाएगा। उसके बाद नालों के दूषित जल को शोधित करके ही गंगा में गिराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि असि और वरुणा नदी में गिरने वाले नालों और राजघाट के पास गंगा में गिरने वाले कोनिया नाले से सर्वाधिक दूषित जल गंगा में पहुंच रहा है। इसके अलावा मणिकर्णिका, त्रिलोचन, ललिता और हरिश्चंद्र घाट पर नालों का पानी गंगा में गिरता है।
इसके अलावा कई घाटों पर नालों का पानी बह रहा है। उन्होंने दावा किया कि दोनों एसटीपी बनने के बाद इन नालों का दूषित जल गंगा में नहीं गिरेगा। दीनापुर में किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रदेश सरकार जल्द से इस मामले को निबटा दे तो वहां काम तेजी से शुरू हो जाएगा। रमना में भी काम जल्द पूरा कराया जाएगा।
घाट पर बनेंगे डस्टबिन और टॉयलेट
उन्होंने कहा कि घाट पर गंदगी न हो इसके लिए स्थानीय निकाय डस्टबिन और टॉयलेट की व्यवस्था करे। साथ ही अस्सी से राजघाट तक सफाई के लिए सफाईकर्मी और सुपरवाइजर नियुक्त कर उनकी जवाबदेही तय की जाए।
गंगा को निर्मल बनाने और घाटों को साफ-सुंदर रखने के लिए लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है। गंगा किनारे जमा कूड़े का उठान नाव से कराया जाए। इसके लिए नगर निगम प्रस्ताव बनाकर भेजे।
नमामि गंगे परियोजना के तहत नावें मुहैया कराने के लिए धन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पहले निदेशक चमललाल ने गंगा और घाटों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद वे नगर निगम में महापौर रामगोपाल मोहले, नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक जेपी राय एवं जलकल के सचिव एसपी श्रीवास्तव के साथ बैठक कर अब तक किए जा रहे उपायों और प्रयासों का हाल जाना।
गंगा में बहते नालों को देख एडिशनल डायरेक्टर खफा
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के एडिशनल डायरेक्टर चमन लाल ने अपने दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को गंगा घाटों पर निर्मलता की हकीकत देखी। सुबह अफसरों की टीम के साथ वह नगवा नाले पर पहुंचे। वहां गंदा पानी बहता देख उन्होंने नाराजगी जताई।
इसके बाद वे रमना भी गए, जहां 50 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना है। मौजूदा समय में 23 जगहों पर नालों से शहर के घरेलू और औद्योगिक नालों का गंदा पानी गंगा में बहाया जा रहा है।
एडिशनल मिशन डायरेक्टर ने जायका, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जितना जल्दी हो सके, इन नालों को रोका जाए ताकि गंगा निर्मलीकरण का सपना साकार हो सके।