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'सेंसेक्स डाउन, रुपया डाउन, मोदी सरकार डाउन'

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जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया लाल पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाकर जेल में डालने, पत्रकारों की पिटाई और मौजूदा स्थिति को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार कड़ी आलोचना की है। पार्टी प्रवक्ता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को देश और सरकार चलाना नहीं आता।
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सिब्बल ने केन्द्र सरकार के प्रशासनिक तरीके पर भी सवाल उठाया और कहा कि इसके चलते सेंसेक्स डाऊन, रुपया डाऊन और मोदी सरकार भी डाऊन है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि देश का युवा केन्द्र सरकार के निशाने पर है। एफटीआईआई, मद्रास आईआईटी, हैदराबाद विश्वविद्यालय, जेएनयू सभी इसके शिकार हो रहे हैं।

जेएनयू में बिना वीसी की जांच के ही पुलिस घुसकर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज कर रही है और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि सरकार को राष्ट्रद्रोह की परिभाषा पता भी है, क्योंकि नारे लगाने भर से राष्ट्रद्रोह नहीं हो जाता।
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उन्होंने सवाल किया कि जब साक्षी महाराज गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के सम्मान में बोलते हैं, जम्मू-कश्मीर में आईएसआईएस के समर्थन में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां होती हैं, झंडा फहराया जाता है, तब राष्ट्रद्रोह क्यों नहीं लगता? लेकिन जब कुछ लोग एबीवीपी, भाजपा के खिलाफ बोलते हैं तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करके उन्हें जेल में ही नहीं भेजा जाता बल्कि अदालत परिसर में लोगों की पिटाई होती है, भाजपा विधायक भी इसमें शामिल होते हैं। क्या यही लोकतंत्र है।

ऊपर से आरएसएस और भाजपा के लोग हमें राष्ट्रभक्ति और देश प्रेम सिखाते हैं। जबकि अफजल गुरु और नाथूराम गोडसे दोनों को फांसी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दी गई थी।
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न्यायालय की अवमानना, होगी निष्पक्ष जांच की मांग

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर दस नंबरी आपात काल लगाने का तंज कसा है। कांग्रेस प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि भाजपा हमेशा कांग्रेस सरकार के समय में लगे आपातकाल की याद दिलाती रहती है, लेकिन वस्तुत: भले ही घोषित न हो लेकिन देश में दस नंबरी आपातकाल लगा है।

अदालत परिसर में सुनवाई के दौरान आये लोगों की पिटाई और विधायक का भी उसमें शामिल होना अदालत की अवमानना है। कपिल सिब्बल का कहना है कि कल इस मामले की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होगी।

इस दौरान अदालत से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ अदालत परिसर में होनी वाली पारपीट की घटनाओं के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।
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