पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बातचीत की पेशकश को लेकर केंद्र सरकार के अंदर ही नहीं बल्कि कांग्रेस के भीतर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सीमा पर भारतीय सैनिकों पर पाकिस्तान के हमले से पहले कांग्रेस रिश्ते सुधारने के लिए बातचीत की बात कर रही थी। मगर इस घटना के बाद कांग्रेस के भी होंठ सील गए हैं।
भाजपा द्वारा पाकिस्तान से बातचीत बंद करने के मुद्दे को सियासी तूल देना भी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन गया है। लिहाजा, पार्टी में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
शुक्रवार को भाजपा ने कांग्रेस पर सियासी दबाव बनाते हुए पाक से तुरंत बातचीत के दरवाजे बंद करने की मांग की है। मगर कांग्रेस दो टूक जवाब देने से बच रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने कहा कि हम विपक्ष की तरह सीधे कोई बात नहीं कर सकते। सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी को सभी परिस्थितियों को देखते हुए बात करनी पड़ती है।
हालांकि पार्टी यह जरूर कह रही है कि एंटनी के बयान में कही गई बात के अनुसार ही अब पाकिस्तान के साथ बर्ताव किया जाएगा। मगर नवाज शरीफ के साथ बातचीत बढ़ेगी या नहीं, इसे लेकर खुलकर राय नहीं दी गई है।
बृहस्पतिवार को भारत ने पाकिस्तान के साथ सचिव स्तर की वार्ता टाल दी है। मगर नवंबर में नवाज और मनमोहन सिंह की मुलाकात को लेकर अभी से कोई नकारात्मक बात नहीं की जा रही है। इसलिए पार्टी ने भी मौजूदा स्थिति में बोलने के बजाय चुप रहना ही बेहतर समझा है।
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पाकिस्तान में निजाम बदला है। ऐसे में अभी से बातचीत के दरवाजे बंद करना ठीक नहीं होगा। मगर मौजूदा हालातों में यह बात कहना ठीक नहीं होगा। इसलिए खुलकर बोलने से परहेज किया जा रहा है।