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हार के इफेक्ट: कांग्रेस में शुरू होगा इस्तीफों का सिलसिला!

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कांग्रेस की ऐतिहासिक हार के साइड इफेक्ट शुरू हो गए हैं। सोनिया और राहुल गांधी के इस्तीफे की अटकलों के बीच कई पार्टी महासचिव, मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष निशाने पर हैं।
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सोमवार को पार्टी कार्यसमिति की बैठक में हाई वोल्टेज ड्रामा की संभावना है। महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और असम के मुख्यमंत्रियों पर इस्तीफे को लेकर पार्टी के अंदर से आवाज उठनी शुरू हो गई है।

सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि जहां कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला है, वहां के प्रदेशाध्यक्ष भी विरोधियों के निशाने पर हैं। लिहाजा, देशभर में कांग्रेस संगठन में अंदरखाने भूचाल की स्थिति पैदा हो गई है।
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कई बड़े नेताओं पर ग‌िरेगी गाज

राहुल के सलाहकार मधुसूदन मिस्त्री, जयराम रमेश, मोहन गोपाल और मोहन प्रकाश भी निशाने पर हैं।

सोमवार को होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया के पार्टी अध्यक्ष और राहुल के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की बात को कांग्रेस के शीर्ष नेता नकार रहे हैं।

सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, महासचिव बीके हरिप्रसाद, शकील अहमद ने इसे खारिज कर दिया है।

मुख्यमंत्रियों पर भी खतरा

सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसा होता भी है तो इसे कोई मानने के लिए तैयार नहीं होगा। मगर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए संकट की स्थिति बन गई है।

हाईकमान ने पहले ही मुख्यमंत्रियों को कह दिया था कि बेहतर प्रदर्शन करो या फिर कुर्सी छोड़ो। महाराष्ट्र में पार्टी की शर्मनाक हार के लिए प्रदेशाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्रियों ने इस्तीफे की पेशकश की है।

मगर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण खामोश हैं। संभावना जताई जा रही है कि वह सोनिया से मिलकर इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं। उधर, असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं।
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वीरभद्र स‌िंह की कुर्सी खतरे में

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कुर्सी भी खतरे में है। उनकी पत्नी भी चुनाव हार गई हैं। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत पर भी इस्तीफे का दबाव है।

पंजाब, हिमाचल, महाराष्ट्र, उत्तराखंड समेत तमाम राज्यों के प्रदेशाध्यक्षों पर भी इस्तीफे का दबाव है। दूसरी तरफ केंद्रीय संगठन में बैठे पार्टी महासचिव भी इस्तीफे की पेशकश कर सकते है।

अजय माकन, गुरुदास कामत, मुकुल वासनिक और अंबिका सोनी चुनाव भी हार गए हैं।
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