राजद और जदयू में अगर बिहार विधानसभा चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं हुआ तो लालू प्रसाद यादव को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
ऐसी स्थिति में अधिक सीट पाने और नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाने पर अड़े लालू को चुनावी मैदान में अकेले की खड़ा होना पड़ सकता है।
दरअसल कांग्रेस ने तय किया है कि गठबंधन न होने की स्थिति में वह नीतीश को चेहरा बनाकर चुनाव मैदान में उतरेगी।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को बिहार इकाई के अध्यक्ष अशोक चौधरी और प्रभारी सीपी जोशी के साथ सूबे की स्थिति पर लंबी चर्चा की।
नीतीश कुमार के साथ जाएगी कांग्रेस
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक राहुल ने राजद-जदयू के साथ न आने की स्थिति में जदयू के साथ गठबंधन की दिशा में काम करने का निर्देश दिया है।
कांग्रेस को पता है कि अगर वह भाजपा के खिलाफ बनने वाले बड़े गठबंधन का हिस्सा बनी तो उसके हाथ बहुत कम सीटें आएंगी। वहीं राजद के साथ जाने पर सियासी घाटे की आशंका है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसे में उसके लिए पाकसाफ चेहरे नीतीश का साथ ज्यादा सही होगा। राज्य इकाई ने भी जदयू के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी थी।
गठबंधन को लेकर नरम पड़ सकते हैं आरजेडी के तेवर
फिलहाल लालू की शर्तों से खफा नीतीश ने वाम दलों के साथ-साथ राजद से निष्काषित होकर नई पार्टी बनाने वाले सांसद पप्पू यादव से भी संपर्क साधा है।
इस कवायद को नीतीश और लालू की सियासी जोर-आजमाइश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि दोनों ही दलों के नेता मानते हैं कि इससे चुनाव पूर्व गठबंधन का रास्ता खुल जाएगा।
खासकर कांग्रेस के रुख के बाद लालू के तेवरों में नरमी आएगी। वैसे जुलाई में हो रहे विधान परिषद के चुनाव से भी गठजोड़ के बारे में स्थिति बहुत हद तक साफ हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस, राजद और जदयू ने 24 सीटों पर हो रहे चुनाव को मिलकर लड़ने का फैसला किया है।