एक के बाद एक सामने आ रहे घोटालों की वजह से पैदा हुई स्थिति से निपटने में जुटा कांग्रेस हाईकमान उत्तर प्रदेश की चुनावी तैयारियों के बारे में भूल सा गया है।
प्रदेश में संगठन में फेरबदल, जोनल प्रभारियों को बदलने और बड़े चुनावी प्रचार अभियानों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। प्रदेश कांग्रेस के इन प्रस्तावों पर हाईकमान कुंडली मार कर बैठा है। शुक्रवार को बुलाई गई यूपी कांग्रेस की समीक्षा बैठक भी राहुल गांधी की व्यस्तता की वजह से स्थगित हो गई।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री नियुक्ति के महीनों बाद भी अपनी नई टीम नहीं बना सके हैं। हाईकमान को लगभग महीने भर पहले उन्होंने प्रदेश कांग्रेस संगठन में जिला और ब्लॉक स्तर पर बड़े फेरबदल का प्रस्ताव भेजा था।
इसमें लगभग 70 से 80 प्रतिशत जिलाध्यक्षों को बदलने की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव पर हाईकमान ने कोई फैसला नहीं लिया है। इसके अलावा यूपी के आठ जोनल अध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट भी भेजी गई थी।
इनमें इनकी निष्क्रियता की बात बताई गई थी। राहुल ने इसे गंभीरता से भी लिया था। खत्री ने अपनी रिपोर्ट में जोनल अध्यक्षों को बदले जाने की सिफारिश की थी।
राहुल ने उस समय पूर्णकालिक जोनल अध्यक्षों को काम देने की बात कही थी। मगर हाईकमान ने कोई फैसला नहीं लिया है। शुक्रवार को राहुल गांधी की ओर से समीक्षा बैठक बुलाई थी। मगर ऐन वक्त पर बैठक टाल दी गई।
प्रदेश के नेता सभी दिल्ली पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। प्रदेश कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के चुनावी कार्यक्रम का प्रस्ताव भी भेजा गया है। मगर अभी तक एक कार्यक्रम को भी मंजूरी नहीं दी गई है।
दूसरी पार्टियों ने प्रचार अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन कांग्रेस इस मामले में पीछे चल रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने हालांकि दावा किया कि राहुल गांधी यूपी के संगठन में फेरबदल को लेकर जल्द फैसला ले सकते हैं।