महिला जासूसी कांड के मुद्दे पर एक बार फिर से मुंह की खाने के बाद कांग्रेस और सरकार के बीच गंभीर मतभेद सामने आ गए है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के ऐतराज के बावजूद सरकार सार्वजनिक तौर पर इस मामले पर आगे बढ़ी।
पार्टी के कई शीर्ष नेता इस फजीहत के लिए कानून मंत्री कपिल सिब्बल और केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सूत्र संकेत दे रहे हैं कि पार्टी हाईकमान इस मामले को लेकर बेहद नाराज है और इस फजीहत के लिए जिम्मेदार मंत्रियों को आगे चलकर हाशिये पर डाला जा सकता है।
मंत्रियों का उत्साह पड़ा भारी
पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि जांच आयोग के अध्यक्ष के तौर पर कोई योग्य जज नहीं मिलने का कोई मुद्दा नहीं था।
दरअसल, शुरू से ही इस मसले पर सरकार के अंदर और पार्टी से जबरदस्त मतभेद था। मगर सरकार के कुछ उत्साही मंत्रियों ने इस पर आगे बढ़ने की जिद कर ली।
महिला जासूसी कांड ही नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा कानून, भ्रष्टाचार निरोधक बिल, लोकपाल की नियुक्ति, न्यायिक जवाबदेही विधेयक समेत तमाम मुद्दों पर सरकार के बड़े मंत्रियों से कांग्रेस को फजीहत का सामना करना पड़ा है।
प्रियंका के हमले के बाद कांग्रेस हुई थी हमलावार
पार्टी के शीर्ष मैनेजरों का मानना है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने अति उत्साह में नरेंद्र मोदी को एक बार फिर कांग्रेस को कोसने का सुनहरा मौका दे दिया है। प्रियंका गांधी ने जिस तरह से मोदी को घेरने की कोशिश की थी।
उसके बाद कांग्रेस के प्रचार अभियान में तेजी आई थी। पार्टी मोदी के खिलाफ खुलकर सियासी निशाना साध रही थी।
मगर महिला जासूसी कांड की फाइल खोलकर सरकार ने खुद ही मुसीबत मोल ले ली। सलमान खुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी, पी चिदंबरम ने इसका विरोध भी किया था।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस मामले में कोई योग्य न्यायाधीश नहीं मिलना तो कोई मुद्दा ही नहीं था। जब ये मामला कैबिनेट में आया तो तब भी कई मंत्रियों ने इसका विरोध किया।
कोई जज नहीं था तैयार
ए के एंटनी, शरद पवार और वीरप्पा मोइली इसके पक्ष में नहीं थे। जबकि कुछ दिन पहले कपिल सिब्बल ने जज की नियुक्ति करने की बात कही तो तब भी इसका विरोध किया गया।
मंत्रियों को समझाया गया कि था कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी इस संबंध में सहमत नहीं होंगे। मगर उत्साही मंत्री रुकने के लिए तैयार नहीं थे।