लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी में ही निशाने पर आए कांग्रेस हाईकमान को आखिरकार अनुशासन का डंडा उठाना ही पड़ा है।
बृहस्पतिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरियाणा के वरिष्ठ नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह और पंजाब के पार्टी नेता जगमीत सिंह बड़ार को निलंबित कर दिया। बड़ार पिछले कई दिनों से सीधे सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी पर निशाना साध रहे थे।
वहीं वीरेंद्र ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से खुली बगावत करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी छोड़ने के संकेत दिए थे। वीरेंद्र राज्यसभा सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हैं।
पार्टी में कर रहे थे बगावत
दोनों नेताओं के खिलाफ शिकायतों की जांच कांग्रेस की केंद्रीय अनुशासन समिति कर रही थी। पार्टी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अनुशासन समिति ने दोनों नेताओं को कांग्रेस की प्रतिष्ठा खराब करने और अनुशासन भंग करने का दोषी पाया है।
इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष ने दोनों नेताओं को निलंबित करने की सिफारिश मंजूर कर ली हैं। वीरेंद्र सिंह लंबे अर्से से मुख्यमंत्री हुड्डा को हटाने की मांग कर रहे थे।
उन्होंने सोनिया से साफ कह दिया था कि हुड्डा की अगुवाई में वह विधानसभा चुनाव में काम करने के लिए तैयार नहीं हैं। हाईकमान ने उन्हें काफी समझाने की कोशिश की।
पार्टी नेतृत्व से नाराज थे नेता
जब हाईकमान ने साफ कर दिया कि वह चुनाव तक हुड्डा को नहीं हटाएगी तो फिर उन्होंने बगावती तेवर अपना लिया और भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ संपर्क के तार जोड़ लिए। अब माना जा रहा कि इस निलंबन के बाद उनका भाजपा में शामिल होना महज एक औपचारिक ऐलान भर रह गया है।
उधर पूर्व सांसद बड़ार पंजाब के पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के धुर विरोधी माने जाते हैं। उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट देने से हाईकमान ने इनकार कर दिया था। इससे वह नाराज थे।
उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में कार्यकर्त्ताओं के साथ कुत्तों जैसा व्यवहार किया जाता है। सोनिया और राहुल को देश भ्रमण पर जाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा था कि मोती लाल वोरा को कांग्रेस की कमान सौंपनी चाहिए।