कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में वित्त मंत्रालय के नियंत्रण में चलने वाले एक सरकारी बैंक की मिलीभगत से 6172 करोड़ रुपये का काला धन देश के बाहर भेजा गया है।
पार्टी ने कहा कि यह घोटाला कालाधन छिपाने वाले देश मारीशस या स्विट्जरलैंड में नही बल्कि देश की राजधानी दिल्ली की बैंक ऑफ बड़ोदा की शाखा में हुआ है। पार्टी प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि यह भ्रष्टाचार जुलाई 2014 से अगस्त 2015 के बीच हुआ है।
भारत सरकार के एक बैंक ने तय मानकों का माखौल उड़ाया। सिंह ने कहा कि बैंकों के लिए रुपये जमा करने और निकालने के लिए नियम तय है। नियमों के अनुसार बैंकों को 50,000 रुपये से अधिक रकम जमा करने वाले व्यक्ति या संस्था के पैन कार्ड की जांच करना जरूरी है।
साथ ही खाताधारक के लिए केवाईसी यानी उपभोक्ता को जाने जैसी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। पार्टी प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि इन नियमों के बावजूद काल्पनिक और फर्जी कंपनियों ने 6172 करोड़ रुपये बैंक में कैसे जमा करा दिए।