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कांग्रेस के इस दांव से चारों खाने चित हुए लालू

Tue, 02 Jun 2015 02:52 PM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
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आखिरकार बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सियासी दांव से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को अपने तीखे सुर को नरम करना पड़ा है।
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कल तक जदयू के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन पर कई शर्तें रख पेंच फंसाने वाले राजद प्रमुख ने मतभेद संबंधी खबरों को खारिज करते हुए हर हाल में महागठबंधन बनाने की घोषणा की है।

दरअसल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बाद सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी राजद और जदयू के बीच गठबंधन न होने की स्थिति में नीतीश की अगुवाई में चुनाव लड़ने का साफ संदेश दे दिया।
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लालू पर बढ़ा दबाव

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने भी खुल कर कहा कि पार्टी चुनाव में नीतीश का दामन थामेगी।

लगे हाथ बिहार के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने भी इसकी सार्वजनिक पुष्टि कर दी, जबकि नीतीश ने भी लालू पर दबाव बढ़ाते हुए कांग्रेस के साथ हर हाल में गठबंधन करने की घोषणा कर दी।

कांग्रेस का खुल कर नीतीश के पक्ष में खड़े हो जाने से अब राजद सुप्रीमो के सामने जदयू पर दबाव बनाने का कोई विकल्प नहीं बचा है।

लालू ने भरी हामी

यही कारण है कि किसी को सीएम पद का उम्मीदवार न बनाने, लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर सीटों का बंटवारा करने और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को गठबंधन में शामिल करने की शर्त रखने वाले लालू ने अचानक हर हाल में भाजपा के खिलाफ जदयू सहित अन्य दलों के साथ मोर्चा खड़ा करने की घोषणा की।

राहुल के बाद अब सोनिया ने भी जदयू-राजद के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन न होने की स्थिति में नीतीश के साथ चुनाव मैदान में उतरने पर हामी भर दी है।

पार्टी के बिहार इकाई के अध्यक्ष चौधरी ने सोनिया से मुलाकात के बाद कहा कि हम बार-बार जदयू के साथ चुनाव मैदान में उतरने की बात कर रहे हैं, यही सच है।
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कांग्रेस नहीं चाहती की जदयू और राजद में हो गठबंधन

नीतीश बेहतरीन और ईमानदार मुख्यमंत्री हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले लोकसभा चुनाव में राजद के साथ तालमेल से नाराज राहुल ने चौधरी को नीतीश के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी का निर्देश दिया था।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी नहीं चाहती कि जदयू और राजद के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन हो। इससे कांग्रेस को लड़ने के लिए कम सीटें मिलेंगी। इसके बावजूद अगर गठबंधन होता है तो भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस भावी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनने से परहेज नहीं करेगी।

हालांकि लालू के ढीले पड़े तेवर के बाद अब राजद-जदयू के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन की संभावना एक बार फिर बनती दिख रही है।
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