लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। राहुल को अब दूसरे दलों से ही नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर से भी चुनौती मिलेगी।
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आने वाले समय में इस हार का सबसे ज्यादा असर राहुल की नई टीम को देखने को मिल सकता है। साथ ही राहुल गांधी के लिए पार्टी में आगामी फेरबदल में अपनी पसंद के मुताबिक बदलाव करना आसान नहीं रहेगा।
मौजूदा हालात में वह बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार करने का खतरा नहीं मोल सकते। इन सबके बीच, आने वाले दिनों में पार्टी के कई नेता राहुल के खिलाफ बयानबाजी भी कर सकते हैं। राहुल गांधी 2007 के बाद से ही कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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उसके बाद से कई राज्यों में विधानसभा चुनावों में उनकी अग्निपरीक्षा हुई, लेकिन राहुल गांधी को लगातार मात खानी पड़ी। 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा दांव में लगा दी, लेकिन दर्जन भर सीटें ही जितवा सके।
राहुल गांधी ने देर से किया प्रचार
पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात में भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। पिछले चुनाव में बिहार में भी पार्टी को शर्मनाक हार मिली।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी को भाजपा से इक्का-दुक्का सीटें अधिक मिली तो हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह के जनाधार के चलते कांग्रेस को जीत मिली। राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है।
2013 में राहुल को महासचिव से उपाध्यक्ष बना दिया गया। इसके बाद 2014 में पार्टी को लोकसभा में शर्मनाक हार मिली। 2009 में 206 सीटें पाने वाली कांग्रेस महज 44 सीटों के साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद हासिल करने के लायक भी नहीं रही।
महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव में राहुल गांधी ने बहुत देर से चुनाव प्रचार शुरू किया। प्रचार खत्म होने से मात्र सात दिन पहले पार्टी उपाध्यक्ष ने चुनावी रैलियां शुरू की। कांग्रेस के अंदर ही इसे लेकर सवाल खड़े हुए। कई नेताओं का कहना था कि हार की संभावना के चलते राहुल ने चुनावों में जल्द प्रचार में कूदने से परहेज किया।
इन मुद्दों को लेकर कई नेता राहुल को निशाने पर ले सकते हैं। मगर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस स्थिति से बचने के लिए पहले ही रणनीति बना रही हैं। रविवार को नतीजे आने के बाद उन्होंने कांग्रेस के कई नेताओं से बातचीत की। बहरहाल, हो सकता है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस प्रवक्ता और कुछ भरोसेमंद नेताओं को राहुल के बचाव में मैदान में उतार दिया जाए।
ये दोहरी हार न बन जाए सिलसिलेवार
लोकसभा चुनाव की करारी शिकस्त से जूझ रही कांग्रेस के लिए हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की बुरी हार उसके सियासी भविष्य को लेकर डरवानी है। इस दोहरी हार के बाद आशंका यह है कि कांग्रेस की चुनावी हार का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा।
कांग्रेस को आने वाले दिनों में झारखंड, जम्मू कश्मीर, असम, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई और राज्यों में विधानसभा चुनाव की जंग झेलनी है। जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा दिन व दिन मजबूत होती जा रही है। उसे देखते हुए पार्टी को अच्छा प्रदर्शन ही नहीं बल्कि अपने अस्तित्व बचाने की लड़ाई भी लड़नी पड़ेगी।
हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी हार को स्वीकार करती है और उम्मीद करती है कि जो भी पार्टी इन राज्यों में सत्ता में आती है। वे जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी।
'कांग्रेस फिर से करेगी कड़ी मेहनत'
उधर, राहुल गांधी ने कहा है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है। जहां हरियाणा में कांग्रेस की दस साल और महाराष्ट्र में 15 साल से सरकार थी। भाजपा को जीत की बधाई देते हुए राहुल ने कहा कि कांग्रेस जमीन पर फिर से कड़ी मेहनत कर जनता का विश्वास हासिल करने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस मुख्यालय और दस जनपथ के बाहर सुबह से कुछ कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्त्ताओं ने प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग की। ये कार्यकर्त्ता सुबह नौ बजे ही पहुंच गए। जैसे उन्होंने चुनावी नतीजों का रात से ही अंदाजा लग गया था। आने वाले महीनों में सबसे पहले झारखंड और जम्मू कश्मीर में चुनाव होने जा रहे हैं।
झारखंड में कांग्रेस झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ सत्ता में है। जबकि जम्मू और कश्मीर में कांग्रेस कुछ महीने पहले ही नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन वाली सरकार से अलग हुई है। दोनों राज्यों में ही पार्टी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहरों का असर जनता के गुस्से में तब्दील में होने का खतरा है। इसके बाद असम, दिल्ली, बिहार में चुनाव में भी कांग्रेस की हालत कुछ ज्यादा स्थिति नहीं है।
लोकसभा चुनाव की हार के बाद कांग्रेस को कुछ विधानसभा उपचुनाव में लगातार जीत मिली तो पार्टी के बड़े नेता कहने लगे कि नरेंद्र मोदी का जादू खत्म हो गया है। लेकिन दोनों राज्यों में भाजपा की बड़ी जीत से कांग्रेस हाईकमान के सामने अपने कार्यकर्त्ताओं का जोश बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
प्रियंका के चुनावी लांच में रॉबर्ट पर लगे दाग बन रहे हैं रोड़े
हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की करारी हार के बाद प्रियंका गांधी को कांग्रेस में सामने लाने की मांग तेज हो गई है। मगर प्रियंका के चुनावी लांच में उनके पति रॉबर्ट वाड्रा पर जमीन घोटाले के दाग रोड़े बन रहे हैं।
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की माने तो वाड्रा पर लगे दाग धुलने के बाद ही प्रियंका कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में आने की ओर रुख कर सकती हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस प्रियंका का रास्ता साफ करने के लिए आने वाले दिनों में इसी दिशा में कदम बढ़ा सकती है।
पार्टी के शीर्ष मैनेजरों की कोशिश है कि 2019 के अगले लोकसभा चुनाव से पहले रॉबर्ट को क्लीन चिट दिलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया जाए। लोकसभा चुनाव और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगा चुके हैं। मोदी ने हरियाणा की कांग्रेस सरकार पर वाड्रा को कौड़ियों के दाम पर जमीन देने का आरोप लगाया था।
अब चूंकि हरियाणा में भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आ गई है। इसलिए हरियाणा की भाजपा सरकार पर भी प्रधानमंत्री के आरोपों पर जांच करने का दबाव होगा। इससे भी प्रियंका की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि प्रियंका को बैकफुट पर रखने के लिए भाजपा इस मुद्दे को हवा देने की कोशिश करेगी।
इसलिए वाड्रा को बेदाग साबित करने के लिए पार्टी के शीर्ष मैनेजर अदालत की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा कि प्रियंका 2019 से पहले कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में आने को लेकर गंभीरता से सोच सकती हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा कि कांग्रेस में सक्रिय राजनीति आने की स्थिति में वह अपने भाई से नीचे के पद पर ही रहना चाहेंगी।