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कांग्रेस ने मोदी को माना आम चुनाव की मुख्य चुनौती

Tue, 16 Jul 2013 01:38 AM IST
नई दिल्ली/संजय मिश्र
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महज 72 घंटे में ही कांग्रेस की रणनीति बदल गई। पार्टी के हमले के केंद्र में अब भाजपा नहीं, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
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मोदी को कांग्रेस लगातार एक सूबे का मुख्यमंत्री और नेता बता कर ज्यादा अहमियत देने से इंकार करती रही थी। अब उसी मोदी के बयान के एक-एक शब्द और एक-एक पंक्ति पर कांग्रेस के आला नेताओं की फौज पूरी तैयारी से ताबड़तोड़ हमले बोल रही है।

संकेत साफ है। बदली राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस मान चुकी है कि उसके लिए मुख्य चुनौती मोदी हैं। यही कारण है कि कांग्रेस अब 2014 की लड़ाई को पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता बना देने की रणनीति पर काम कर रही है।
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बीते तीन दिनों में मोदी पर एकजुट और रणनीति के तहत हमला कर कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव में यूपीए सरकार की कामयाबी या नाकामियों की बजाय धर्मनिरपेक्षता के इर्द-गिर्द पूरी सियासी बहस को केंद्रित करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मोदी के कुत्ते वाले बयान पर मचा बवाल

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस मोदी के लेकर खुद को निश्चिंत दिखाना चाह रही थी। यहां तक कि भाजपा की ओर से मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाने के लगातार संकेत देने और बाद में चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के बावजूद कांग्रेस अपनी पुरानी रणनीति पर चल रही थी।

मोदी के एक-एक हमले पर कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया होती थी कि इसका जवाब उनकी राज्य इकाई देगी।

बीते दिनों जब मोदी ने विदेश नीति को लेकर यूपीए सरकार पर हमला बोला तो विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने उन्हें विदेश नीति की समझ न होने और अपने सूबे पर ध्यान देने की नसीहत दे डाली।

'संकट देखते ही बुर्के में छिप जाती है कांग्रेस'

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर मोदी के सीधे हमले पर भी पार्टी के नेता इतने आक्रामक नहीं हुए। मगर बीते शुक्रवार को एक साक्षात्कार और रविवार को पुणे के कार्यक्रमों में मोदी के तीखे हमले ने कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया।

अब कांग्रेस मोदी के बयान के एक-एक शब्द और एक-एक पंक्ति को चुन कर मुद्दा बना रही है। मसलन साक्षात्कार में मोदी के कुत्ते के बच्चे के भी कार के नीचे आ जाने पर दुख होने के बयान को कांग्रेस ने बड़ा मुद्दा बनाया तो पुणे में दिए गए भाषण में मुसीबत के समय धर्मनिरपेक्षता का बुर्का ओढ़ने की बात पर आक्रामक रुख अख्तियार किया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एकजुट होकर पूरी तैयारी से मोदी पर किए गए हमले का राजनीतिक संकेत साफ है। कांग्रेस ने मोदी को लोकसभा चुनाव की मुख्य चुनौती के रूप में स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही आमचुनाव के लिए मोदी के बहाने धर्मनिरपेक्षता बनाम सांप्रदायिकता को मुख्य मुद्दा बनाने की रणनीति भी तय कर ली है।
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यही कारण है कि पार्टी का पूरा जोर अब भाजपा पर प्रहार करने की बजाय मोदी पर हमला करना है। बहरहाल, कांग्रेस की रणनीति से साफ है कि वह इस जंग को राहुल बनाम मोदी बनने देने की बजाय कांग्रेस बनाम मोदी बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
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