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हाथरस में 45 ईसाइयों ने फिर से अपनाया हिंदू धर्म

Sat, 30 Aug 2014 03:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
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यूपी में इन दिनों धर्म शब्द कुछ ज्यादा ही चर्चा में है। ऐसा आध्यात्मिक आयोजनों को लेकर नहीं बल्कि धर्म के नाम पर उठ रहे विवादों के कारण है। प्रदेश के अलीगढ़ मंडल के गांव असरोई के धर्मांतरण का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि जिला हाथरस के कस्बा हसायन के मोहल्ला जाटवान में 6 परिवारों के 45 लोगों की ईसाई से हिंदू धर्म में वापसी का मामला और प्रकाश में आया है। हिंदूवादियों ने एक घर में हवन यज्ञ कर कुछ लोगों को हिंदू धर्म में शामिल कराया। हिंदूवादियों का दावा है कि छह परिवार के 45 लोगों को ईसाई धर्म से वापस हिंदू धर्म में शामिल किया गया है।
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हिंदूवादियों की चर्च में कार्यक्रम आयोजित करने की प्लानिंग थी
हिंदूवादी हवन यज्ञ और अन्य कार्यक्रम मोहल्ले में ही बने चर्च में करना चाहते थे। लेकिन योजना को चर्च के पादरी ने विफल कर दिया। कार्यक्रम से पहले ही चर्च के पादरी को इसकी जानकारी हो गई। उसने इस बारे में प्रशासन को सूचित कर दिया। एसडीएम सिकंदराराऊ, सीओ सिकंदराराऊ व अन्य फोर्स मौके पर पहुंच  गया। चर्च के आस-पास पुलिस की मौजूदगी के चलते यह कार्यक्रम पास के एक घर में हुआ।

चर्च के पास ही उदयवीर पुत्र कल्लू के घर में वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच उदयवीर के परिवार के अलावा सिकतरा, वकायन व लोधीपुर के भी कई लोग शामिल हुए। हवन यज्ञ के बाद वहां प्रसाद आदि का भी वितरण हुआ। इस मौके हिंदूवादी संगठनों के लोगों में मुख्य रूप से धर्म जागरण समिति के क्षेत्र प्रमुख राजेश्वर सिंह,, बजरंग दल के प्रांत सुरक्षा प्रमुख अभिषेक रंजन आर्य आदि मौजूद थे।
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44 साल पहले प्रलोभन देकर बना दिया था ईसाई

ईसाई धर्म को छोड़ परिवार सहित हिंदू बने उदयवीर का कहना है कि उसके पिता ने ईसाई धर्म परिवार सहित स्वीकार लिया था। उन्होंने ही ईसाई धर्म के लोगों को अपनी यह जमीन 1970 में दी थी। यह जमीन धर्मशाला आदि के लिए दी थी। उस समय यह लालच दिया गया था कि उन्हें और उनके परिवार को रोजगार दिया जाएगा। अन्य सुुविधाएं भी मिलेंगी, लेकिन इस जमीन पर चर्च बना दिया।

चर्च में दुकानें भी बन गई, जोकि उन्हें नहीं मिली। अब वह अपनी इच्छा से अपने परिवार सहित हिंदू धर्म को स्वीकार कर रहा है। बजरंग दल के प्रांत सुरक्षा प्रमुख अभिषेक रंजन कहते हैं कि ये लोग भले ही सरकारी रिकॉर्ड में दलित हों, लेकिन इन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर ईसाई बना दिया गया। इन्हें उसी तरीके से पूजा-अर्चना कराई जाती है। अब ऐसे लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है, जोकि प्रलोभन और लालच में हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बने थे। इन लोगों को वैचारिक रूप से हिंदू बनाया जा रहा है। इन लोगों की धर्म वापसी कराई गई है। यह लोग अब हिंदू धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार ही पूजा-अर्चना करेंगे।

प्रशासन ने भी मानी प्रलोभन की बात
प्रशासन भी प्रलोभन वाली बात की ही पुष्टि कर रहा है। सासनी तहसील के एसडीएम एनपी पांडेय कहते हैं करीब 20-25 साल पहले ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रलोभन देकर यह जमीन ट्रस्ट के नाम करा ली थी। वहां अब चर्च है। अब क्योंकि जमीन कीमती है तो यह फिर से इस जमीन को पाने के लिए हिंदू धर्म में वापस आ रहे है। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन सोसायटी के नाम है तो वह उसी संस्था के नाम रहेगी।
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असरोई के चर्च पर पुलिस का पहरा

अलीगढ़ के इगलास थाना क्षेत्र के गांव असरोई के चर्च पर अब पुलिस का पहरा लग गया है। शुक्रवार को भी गांव में अधिकारी आए और स्थिति की जानकारी ली। इधर, लगातार मीडिया कर्मियों की आवाजाही से ग्रामीणों के चेहरों पर परेशानी झलकने लगी है। शुक्रवार को भी इलेक्ट्रानिक मीडिया की टीमें गांव में आई और धर्म परिवर्तन करने वालों से कई सवाल किए। तरह-तरह के सवालों के वह जवाब देते हुए थक गए हैं।

उल्लेखनीय है कि चार दिन पहले अलीगढ़ जिले के इगलास थाना क्षेत्र के गांव असरोई में एक ईसाई मिशनरी संस्था के चर्च में हिंदूवादियों ने आठ परिवारों के लोगों का धर्म परिवर्तन कराया था। वहां देवी-देवताओं के पोस्टर लगा दिए गए थे और इन लोगों को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच फिर से हिंदू बना दिया था। यह पूरा कार्यक्रम चूंकि चर्च के अंदर हुआ था, इसलिए मामले ने तूल पकड़ लिया था। मामला मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद गुरुवार को एसडीएम इगलास वहां गए थे। इससे पहले ही वहां से देवी-देवताओं की तस्वीरें हटा ली गई थी। एसडीएम ने वहां धर्म परिवर्तन करने वालों से बात की थी। वहां यही बात सामने आई थी कि काफी साल पहले इन लोगों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया गया था। अब यह लोग फिर से हिंदू धर्म में शामिल हो गए हैं। इधर,  ग्राम प्रधान का कहना था कि परिवार रजिस्टर के हिसाब से यह पहले भी हिंदू थे और अभी भी हिंदू हैं। यह जाति से वाल्मीकि हैं।

वहीं जिस संस्था का चर्च है, उससे जुड़े लोग भी गुरुवार को पहुंचे थे और उन्होंने अधिकारियों के समक्ष चर्च की सुरक्षा की बात रखी थी। अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि चर्च की पूरी सुरक्षा होगी। किसी को कब्जा आदि नहीं करने दिया जाएगा। यही बात प्रधान पुत्र आदि ने कही थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब यह मामला शांत हो जाएगा, लेकिन शुक्रवार को फिर मीडिया की कई टीमें गांव में पहुंचीं और उन्होंने अपने सवालों से धर्म परिवर्तन करने वालों को कुरेद डाला। कुछ चर्च के अंदर भी चले गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को गांव के इस चर्च पर हलका इंचार्ज जितेंद्र गौतम सहित अन्य फोर्स की तैनाती कर दी गई। पुलिस किसी को भी अंदर नहीं जाने दे रही। हलका इंचार्ज का कहना है कि चर्च के अंदर किसी तरह का कोई पोस्टर नहीं लगा है। यह भवन पूरी तरह से सुरक्षित है।
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