ब्रह्मपुत्र नदी के जल विवाद को हल करने के लिए भारत द्वारा पेश एक संयुक्त प्रक्रिया प्रस्ताव को चीन ने मानने से इनकार कर दिया है।
ब्रह्मपुत्र पर चीन तीन और बांध बनाना चाहता है जिसको लेकर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। एक बांध तो भारत को सूचना दिए बगैर ही बनाया जा रहा है।
भारत का मानना है कि ऐसे बांध बनने से नदी के उसके तरफ आ रहे जल प्रवाह पर असर पड़ेगा। जबकि चीन ने कहा है कि उसके बांध रिवर प्रोजेक्ट के तहत बन रहे हैं, जो जल प्रवाह को प्रभावित नहीं करेंगे।
भारत ने जल विवाद को दूर करने के लिए आपसी सहयोग और विश्वास की प्रक्रिया पर जोर दिया। भारत चाहता है ऐसे विवाद के लिए जल आयोग या अंतर सरकारी वार्तालाप जरूरी है।
प्रस्ताव में एक जल संधि बनाने की बात भी कही गई है। वर्तमान में दोनों देश विशेषज्ञ स्तर प्रक्रिया (ईएलएम) के तहत बाढ़ के दौरान सिर्फ हायड्रोलाजिकल इंफार्मेशन जैसे जल स्तर, जल बहाव और वर्षा का स्तर एक दूसरे को सूचित करते हैं।
चीन जल मसले पर इसे ही पर्याप्त मानता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले माह अपनी डरबन यात्रा के दौरान जल मुद्दे को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के समक्ष उठाया था। सिंह ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान जिनपिंग से मुलाकात की थी।