यूपीए सरकार को मुसीबत से बचाने के लिए केंद्र श्रीलंका के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है।
द्रमुक के समर्थन वापसी के बाद मंगलवार को हुई कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक में समस्या के समाधान की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया गया है।
बैठक में सहमति बनी कि सरकार संसद में आने वाले एक या दो दिन में एक ऐसा प्रस्ताव ला लाए जिसमें श्रीलंका में तमिलों के साथ हो रही नाइंसाफी और बदहाली पर चिंता जाहिर की गई हो।
इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि प्रस्ताव के जरिए यह संदेश न जाएं कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप कर रहा है।
डीएमके ने छोड़ा यूपीए का साथ
प्रमुख विपक्षी दल भाजपा भी चाहती है कि भारत दूसरे देश के आंतरिक मामलों में किसी तरह का हस्तक्षेप न करे।
संसद में पेश होने वाले प्रस्ताव के पक्ष में राजनीतिक समर्थन जुटाने को सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों का मन टटोल रही है।
साथ ही संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के खिलाफ पेश होने वाले अमेरिकी प्रस्ताव में संशोधन को लेकर अमेरिका सरकार से भी पर्दे के पीछे बातचीत की जा रही है।
द्रमुक के समर्थन वापसी के बाद कांग्रेस और यूपीए सरकार के रणनीतिकार हरकत में आ गए हैं। संसद भवन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कोर ग्रुप की बैठक में द्रमुक प्रमुख करुणानिधि की मांगों पर विचार किया गया।
सरकार को कोई खतरा नहीं: चिदंबरम
बैठक के बाद वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में संशोधन के लिए सुझाए गए करुणानिधि के सुझावों पर विचार किया गया है।
द्रमुक सरकार पर अमेरिकी प्रस्ताव में नरसंहार शब्द जुड़वाने का दबाव डाल रही है। सरकार बीच का रास्ता निकाल कर इस संकट को दूर करने की कोशिश में है। कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक में रक्षा मंत्री एके एंटनी, चिदंबरम और अहमद पटेल ने भी शामिल थे।