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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की दलील, दूध में मिलाया जाता है केवल पानी

Wed, 17 Oct 2012 11:10 PM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
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केंद्र सरकार की माने तो देशभर में बिकने वाले दूध में पानी के अलावा और किसी तरह की मिलावट नहीं होती है। जबकि सरकारी प्राधिकरण ने ही गत वर्ष अध्ययनों के आधार पर यह साफ किया था कि दूध में तमाम हानिकारक तत्वों की मिलावट होती है।
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केंद्र की ओर से सर्वोच्च अदालत में दायर हलफनामे में इसी प्राधिकरण के अध्ययन का हवाला दिया है। लेकिन पानी की मिलावट का हवाला देते हुए अन्य नुकसानदायक तत्वों को अनदेखा किया गया है। हालांकि केंद्र ने यह स्वीकार किया है कि पानी की मिलावट से भी उपभोक्ता के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के सहायक निदेशक ने सर्वोच्च अदालत में पेश किए गए हलफनामे में इस मसले पर स्वामी अच्युतानंद तीरथ व अन्य की जनहित याचिका को खारिज करने का आग्रह किया है। हलफनामे के मुताबिक प्राधिकरण ने 2011 में देश भर में दूध में मिलावट के सही आकलन के लिए सर्वेक्षण किया था।
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इस सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 88 फीसदी नमूनों में मिलावट पाई गई, जो ग्लूकोज और दूध पाउडर के जरिए की गई। हालांकि हलफनामे में कहा गया है कि प्राधिकरण का अध्ययन कुछ नमूनों में दूध में डिटरजेंट पाउडर की मिलावट का इशारा करता है।

लेकिन ऐसे मामलों का ब्योरा केंद्र ने स्पष्ट नहीं किया है। जबकि याचिका में इसी प्राधिकरण के सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया गया है कि देशभर से लिए गए दूध के 14 प्रतिशत नमूनों में डिटरजेंट की मिलावट पाई गई थी।

दूध में डिटरजेंट की मिलावट को नुकसानदायक करार देते केंद्र ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी पूरी करते हुए कहा है कि ऐसे दूध का उपयोग बहुत ही असुरक्षित है। जबकि उत्तर प्रदेश को छोड़कर दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा व राजस्थान में दूध में मिलावट के मसले पर केंद्र ने जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा।

हलफनामे के मुताबिक सर्वेक्षण में 33 राज्यों से 1791 नमूने लिए गए। इनमें से 1226 नमूने मानकों के मुताबिक नहीं पाए गए। इस तरह ग्रामीण और शहरी इलाकों में लिए गए 68.4 प्रतिशत नमूनों में मिलावट पाई गई। हलफनामे में कहा गया है कि अध्ययन के मुताबिक दूध में ज्यादातर पानी की मिलावट ही की जाती है।

पानी की मिलावट दूध के पोषक तत्व को नहीं कम करती, लेकिन मिलावट में गंदे पानी के उपयोग से दूध उपभोक्ता के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। गौरतलब है कि याचिका में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद्, भारतीय खाद्य एवं मानक प्राधिकरण व कई वैज्ञानिक परीक्षणों का हवाला दिया गया है।
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