केंद्र सरकार बाबा रामदेव पर विभिन्न जांचों का दबाव बनाकर समझौता करना चाहती है। कई माध्यमों से संपर्क साधकर बाबा रामदेव से कहा जा रहा है कि वे आगामी चुनाव में भाजपा को समर्थन न दें और काले धन व भ्रष्टाचार पर मौन हो जाएं। इसके बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा।
बाबा रामदेव के मुताबिक उन्होंने अब तक संपर्क साधने वालों से साफ-साफ कह दिया है कि भ्रष्टाचार और काले धन के साथ-साथ व्यवस्था परिवर्तन पर उनका आंदोलन जारी रहेगा। बाबा ने यह भी कहा है कि किसी राजनीतिक दल को समर्थन देने की घोषणा उन्होंने कभी नहीं की।
बाबा रामदेव पतंजलि योग पीठ और दिव्य योग मंदिर के धार्मिक ट्रस्टों के खातों से लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने से खासे नाराज हैं। उन्होंने कहना है कि यदि वे राजीव गांधी फाउंडेशन को मिलने वाले दान पर सवाल उठाएं, तो बहुत कुछ साफ हो जाएगा। यह दुर्भाग्य का विषय है कि उन्हें 100 करोड़ के नोटिस दिए गए हैं और सारे खाते सीज कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र का यह कदम जनविरोधी है। पतंजलि योग पीठ और दिव्य योग मंदिर के सभी ट्रस्ट दान लेते हैं और बाकायदा उसका लेखा-जोखा उपलब्ध कराते हैं। इसके बावजूद दमन चक्र चलाया जा रहा है जो शर्मनाक है। बाबा रामदेव ने कहा कि विभिन्न सरकारी प्रतिष्ठानों तथा सीबीआई के नोटिसों से वे डरने वाले नहीं हैं।
योगगुरु के मुताबिक सरकार बेचैन है। वह अन्य विषयों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए हमारे प्रतिष्ठानों पर जोर-जबरदस्ती कर रही है। सरकार के कई दूत वार्ता कर चुके हैं और काले धन पर हमारा जवाब सुनकर धमकी भी दे चुके हैं कि यदि पोल खोलने का काम बंद न किया गया तो जेल में डाल दिए जाओगे। योगगुरु का कहना है कि वे जेल जाने के लिए तैयार हैं। रामदेव ने कभी बिकना नहीं सीखा। केंद्र सरकार योग और आयुर्वेद के रास्ते में रुकावटें डालकर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को मदद दे रही है।