सीबीआई को केंद्र के हाथों की कठपुतली कहने वाली भारतीय जनता पार्टी की गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद इशरत जहां मुठभेड़ मामले में सीबीआई जांच पर सहमति व्यक्त की थी।
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार महाधिवक्ता कमाल त्रिवेदी ने गुजरात हाइकोर्ट को बताया था कि गुजरात सरकार खुद किसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना चाहती है। इसके बाद साल 2011 में सीबीआई को यह केस सौंपा गया था।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने पर मोदी और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेता कई बार सीबीआई पर पक्षपात करने का आरोप लगा चुके हैं।
सीबीआई से जांच कराने के लिए 14 आरोपी पुलिस अधिकारियों ने भी हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। आरोपी सीबीआई या गुजरात से न जुड़े हुए किसी आइपीएस अधिकारी के अधीन स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) से जांच चाहते थे। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से भी मंजूरी दे दी गई थी।
इसके बाद न्यायाधीश जयंत पटेल और अभिलाषा कुमारी की बेंच ने 1 दिसंबर, 2011 को इशरत जहां मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
जावेद शेख पुलिस का मुखबिर
इशरत जहां के साथ फर्जी मुठभेड़ में मारा गया जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लई के पुलिस का खबरी होने की बात भी सामने आई है।
जावेद के पिता गोपीनाथ पिल्लई ने यह दावा किया है। उनका कहना है कि वह देशभक्त था और पुलिस की मदद करता था। उन्होंने कहा कि जावेद जिस पुलिस अधिकारी के लिए काम करता था उसके कहने पर वह गुजरात आया था।