सुप्रीम कोर्ट ने घटना के महज आठ महीने के भीतर नाबालिग से रेप मामले की सुनवाई पूरी करते हुए दोषी को कम से कम 35 साल की सजा सुनाई है। इस सजा में किसी तरह की छूट का भी प्रावधान नहीं दिया गया है।
देश में जहां अनगिनत मामले न्याय की बाट जोह रहे हैं, वहां सर्वोच्च अदालत ने यह फैसला सुनाकर एक मिसाल पेश की है।
जस्टिस बीएस चौहान की पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि खासतौर से गंभीर मामलों का निपटारा जल्द किया जाए। जल्द जांच करने और सभी न्यायिक कार्यवाही के जल्द निपटाने की वजह से घटना के आठ महीने के भीतर ही केस का निपटारा हो सका। हम इसकी प्रशंसा करते हैं। जिस देश में अक्सर न्याय के लिए लोगों को बरसों तक इंतजार करना पड़ता है, वहां यह निर्णय एक उदाहरण है।’
हालांकि पीठ ने दोषी मिली फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और साथ ही कहा कि दोषी को कम से कम 35 साल तो जेल में बिताने ही होंगे, उसके बाद ही उसे समय से पहले रिहा करने पर विचार किया जाएगा।
पीठ ने कहा, ‘दोषी ने एक मासूम, असहाय और असुरक्षित नाबालिग के साथ रेप करने का घिनौना अपराध किया है और वह कड़ी से कड़ी सजा पाने का हकदार है। बावजूद इसके यह मामला जघन्यत्म श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए हम फांसी की सजा को खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाते हैं।’