पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, बागपत, शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद जिले के कुल 154 गांवों में जानलेवा पानी उगल रहे हैंडपंपों की वजह से बड़ी आबादी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने इन छह जिलों के गांवों में लगे सभी हैंडपंपों को सील करने का आदेश दिया है। बेंच ने डीएम, एसडीएम और प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों को तत्काल जीपीएस युक्त गाड़ियों से स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का आदेश भी दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को यह आदेश दिया है। इन सभी जिलों में भूजल की जांच के लिए ग्रीन बेंच ने कमेटी गठित की है। इस कमेटी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीसीबी), उत्तर प्रदेश जल निगम शामिल हैं।
ग्रीन बेंच ने कहा कि 48 नमूनों में से 30 नमूने प्रदूषित पाए गए हैं। स्वच्छ पेयजल और वातावरण सबका मूलभूत अधिकार है। वहीं याचिकाकर्ता दोआबा पर्यावरण समिति की ओर से एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने ग्रीन बेंच को बताया कि उन्होंने बागपत जिले में छह गांवों में जाकर साक्ष्य हासिल किए हैं।
ग्रीन पैनल ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी
एनजीटी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेपर व शुगर मिल के जरिये नदी में छोड़े जा रहे कचरे का विस्तृत अध्ययन कर आंकड़ों के साथ विश्लेषणात्मक रिपोर्ट मांगी है।
ग्रीन पैनल ने उद्योगों से निकलने वाली गंदगी को ठिकाने लगाने के लिए तीन महीने में तंत्र स्थापित कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इन गांवों में खाद, यूरिया और कीटनाशक के इस्तेमाल की वजह से होने वाले दुष्प्रभावों की जांच के लिए विशेषज्ञ नियुक्त करने का भी आदेश दिया है।
कैंसर की वजह से तोड़ा 71 ने दम
एडवोकेट बंसल ने बताया कि बागपत के गंगनौली और सरोरा गांव में पेयजल की स्थिति सबसे खराब है। अकेले गंगनौली गांव में करीब 71 लोग कैंसर की वजह से दम तोड़ चुके हैं, वहीं 37 लोग कैंसर से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं करीब सभी जिलों में दूषित पानी की वजह से बच्चों में जन्म से ही बीमारियां हो रही हैं।
तय मानकों से ज्यादा हानिकारक तत्व
इन छह जिलों के गांवों के पानी में मैग्नीशियम, सल्फेट, फ्लोराइड, आयरन, टीडीएस, लेड, कैल्शियम इत्यादि तय मानकों से कई गुना ज्यादा पाए गए हैं। एनजीओ की ओर से दाखिल की गई याचिका में दावा किया गया था कि हिंडन, कालिंदी और कृष्णा नदी के किनारे बसी ग्रामीण आबादी के लिए स्वच्छ पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है।
इन नदियों के पानी में कई हानिकारक तत्व मौजूद हैं।बुरी तरह प्रभावित गांवपश्चिमी उत्तर प्रदेश में छह जिलों के भीतर सबसे ज्यादा प्रभावित गांव गंगौली, रेहतना, सारोरा, बामनोली, कंडेरा, तवेली गढ़ी, झुंडपुर, मिलाना, खपरना, थाल, नांगल, सल्फा, डोंगर और सुन्ना हैं।
औद्योगिक कचरे से पानी प्रदूषित
एनजीओ का दावा है कि बीते 15 से 20 वर्षों के भीतर कृष्णा, कालिंदी और हिंडन नदी का पानी औद्योगिक कचरे की वजह से प्रदूषित हो गया है। मसलन भूजल में हैवी मेटल के साथ आर्सेनिक की मात्रा अत्यधिक है।
कुछ इलाकों में स्थिति इतनी खतरनाक है कि आधे से एक घंटे के भीतर पानी पीते ही लोगों की सेहत बिगड़ रही है। मालूम हो कि इसके बाद 5 अगस्त को ग्रीन पैनल ने इन इलाकों में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने का आदेश दिया था।