सुप्रीम कोर्ट की ओर से अपील खारिज किए जाने के बाद क्या हाईकोर्ट पुनर्विचार की मांग को स्वीकार कर सकता है? इस अहम सवाल पर सर्वोच्च अदालत की बड़ी पीठ सुनवाई करेगी, ताकि इस मसले पर स्थिति स्पष्ट हो सके। क्योंकि शीर्षस्थ अदालत के इस मुद्दे पर आए पिछले फैसले विरोधाभासी हैं।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन व जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा है कि कई पीठों की ओर से पहले जारी किए जा चुके फैसलों में दी गई राय परस्पर विरोधी हैं। ऐसे में इस मसले पर बड़ी पीठ निर्णय लेकर स्पष्ट राय कायम करेगी। पीठ ने कहा कि हम इस मुद्दे पर विचारणीय तर्कों को ध्यान में रखते हुए मामले को बड़ी पीठ के समक्ष भेज रहे हैं।
शीर्षस्थ अदालत की ओर से बिना कोई कारण स्पष्ट किए विशेष अनुमति याचिका को खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार कर सकती है या नहीं, इस पर पहले भी सर्वोच्च अदालत की दो सदस्यीय पीठों ने कई फैसले दिए हैं जिनकी राय एक-दूसरे से अलग है। ऐसे में इस मुद्दे पर बड़ी पीठ का विचार किया जाना जरूरी है।
पीठ ने कहा कि सर्वोच्च अदालत की ओर से याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में लंबित पुनर्विचार याचिकाओं पर निर्णय लिया जाना जरूरी है। इन पुनर्विचार याचिकाओं पर हाईकोर्ट विचार कर फैसला दे सकता है या नहीं, इस पर बड़ी पीठ निर्णय स्पष्ट करेगी। पीठ ने 2009 के पलानी रमन कैथोलिक मिशन के खिलाफ एस भागीरथी अम्मल के मामले का हवाला दिया है।