नए साल में ताबड़तोड़ विवादों ने 23 फरवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में कार्यवाही की राह में कांटे बो दिए हैं। साल की शुरुआत में ही पठानकोट में आतंकी हमला, हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र द्वारा आत्महत्या, अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय विवाद पर सरकार और विपक्ष के रिश्ते की खाई बेहद चौड़ी हो गई है।
खास बात यह है कि बीते तीन सत्रों से पहले भाजपा के बड़बोले नेताओं के बयान से विवाद खड़ा हुआ था तो इस बार खुद सरकार और विपक्ष आमने सामने है। इन सभी विवादों में सरकार का शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष का शीर्ष नेतृत्व के आमने सामने होने के कारण बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद भी धूमिल हो गई है।
इन सभी मुद्दों पर शीर्ष स्तर पर सियासी कटुता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। चूंकि सत्र के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस कारण सियासी कटुता कम होने के बदले और बढ़ जाने के आसार है। ऐसे में इस सत्र में भी सरकार के आर्थिक एजेंडे में ग्रहण लगना फिलहाल तय दिखाई दे रहा है। एक के बाद एक नए विवादों ने संसद के बजट सत्र में बीते तीन सत्रों की तरह ही कामकाज के ठप करने के मजबूत हालात तैयार कर दिए हैं।
बीते शीतकालीन सत्र में महज एक प्रमुख मुद्दा असहिष्णुता पर कामकाज ठप हुआ था तो इस बार मुद्दों की भरमार है। कांग्रेस जहां सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को एकजुट करने में जुटी है, वहीं सरकार जेएनयू के मुद्दे को राष्ट्रवाद से जोड़कर विपक्ष पर जवाबी हमला बोलने की तैयारी कर रही है।