चीन के साथ मिलकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के विवाद के निबटारे पर भारत सरकार भले ही आशावादी हो लेकिन सेना को यह दूर की कौड़ी नजर आ रही है।
सरकार जब भी चीन के साथ एलएसी का मसला हल करने की पहल करती है चीन भारत की ही कब्जाई जमीन के बदले कई इलाकों में रियायत लेने की शर्त लगा देता है।
इसकी मुख्य वजह है कि चीन का भारत के सामरिक तौर पर अहम पांच इलाकों पर कब्जा है। लेकिन भारत के पास चीन की कोई जमीन नहीं है।
सेना के उच्चपदस्थ सूत्र ने अमर उजाला को खास बातचीत में बताया कि इसी तकनीकी पेंच की आड़ में चीन बार-बार घुसपैठ की हिमाकत करता है। ताकि भारत पर बिना लड़े दबाव बना रहे।
यही वजह है कि पिछले सात महीनों में चीनी घुसपैठ की 150 घटनाओं की प्रतिक्रिया में 14वें करागिल दिवस के मौके पर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने माना कि चीन के साथ कम से कम यह व्यवस्था की जाए ताकि सीमा पर शांति बनी रहे।
एंटनी के मुताबिक दोनों देश इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं। सेना के अधिकारी के मुताबिक सीमा पर घुसपैठ दशकों से हो रही है।
एलएसी की जटिलता की वजह से हालात ऐसे हैं कि घुसपैठ को नहीं रोका जा सकता। हर साल दोनों ओर से 250 से 300 बार घुसपैठ होती है। लेकिन पहले इसे सीमा पर तैनात अधिकारी के स्तर पर ही निबटा लिया जाता था।
अधिकारी के मुताबिक पिछले कुछ सालों से चीनी घुसपैठ की खबरें मीडिया में जोर शोर से आ जाने की वजह से स्थानीय अधिकारी निबटारे के लिए दिल्ली की ओर देखने लगे हैं। लेकिन सरकार की मजबूरी यह है कि वह चीन के साथ अपनी ही जमीन के बदले सौदेबाजी को तैयार नहीं हो सकती।
अधिकारी ने बताया कि एलएसी पर अक्साई चीन, तवांग ट्रैक सहित पांच ऐसी जगहें हैं जहां चीन का कब्जा है। चीन की अति जटिल मानसिकता को देखते हुए एलएसी विवाद का निबटारा निकट भविष्य में नहीं होता दिख रहा।
सेना के मुताबिक लड़ाई एलएसी विवाद की दवा हरगिज नहीं है। यह बाद भारत और चीन दोनों समझते हैं।
अधिकारी ने साफ किया कि सैन्य ताकत में भारत को चीन से कमजोर समझना भी भारी गलती है। यह बात कोई समझे या नहीं चीन जरूर समझता है। यही वजह है कि दोनों देश किसी भी हालत में एक दूसरे पर गोली नहीं चलाने के करार पर कायम है।
पिछले दिनों दौलत बेग ऑल्डी में तीन हफ्ते तक चीनी सेना के टेंट लगाने के बाद आईटीबीपी और भारतीय सेना के आमने सामने होने के बावजूद किसी ने एक भी गोली नहीं चलाई।
अधिकारी के मुताबिक यहां हालात पाकिस्तान की सीमा के हालात से बिल्कुल अलग हैं।